जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर

जिनगी अबिरथा होगे रे संगवारी
सुना घर – अंगना
भात के अंधना सुखागे
जबले तै छोड़े मोर घर -अंगना
छेरी – पठरू ,घर कुरिया
खेती – खार
खोल – दुवार
कछु नई सुहावे
तोर बोली ,भाखा गुनासी आथे
का मोर ले होगे गलती
कैसे मुरछ देहे मया ल
सात भाँवर मड़वा किंजरेंन
मया के गठरी म बंध गेन
नान – नान, नोनी – बाबू
मया चोहना ल कैसे भुलागे
जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर …..
काबर तै मोला भुलागे
जिनगी ल अबिरथा बनादे
लहुट आ
अब मोर जिनगी म
काबर मया ल भुलागे
जिनगी ल मोर मया म फसा के
जिनगी अबिरथा होंगे रे संगवारी
सुना घर – अंगना

लक्ष्मी नारायण लहरे ” साहिल “
कोसीर सारंगढ ,जिला रायगढ़
09752319395

संघरा-मिंझरा

Leave a Comment