करसी के ठण्डा पानी

गरमी के मउसम अउ सुरूज नरायन अंगरा बरोबर तिपत हे। गरमी बरसात अउ ठण्डा के मउसम एक के पाछु एक आथे एहा जुग जुग ले चलत हे। फेर आजकल के मउसम बदले के समय हा घलो परिवरतन हो गे हे। आधुनिकता, उदयोग अउ बाढ़त परदूसन ले मउसम म घलो बदलाव होवत जावत हे। ऐ बदलाव के करइया हम मनखे मन आन। हमर राज म घलो तीनों ठन मउसम के अब्बड़ महत्व हे। बरसात फेर ठण्डा अउ ठण्डा के पाछु गरमी के मउसम आथे। ठण्डा तक तो नदी नरवा अउ कुवां मन लबालब भरे रहिथे। फेर जइसे गरमी चालू होथे, अउ नदी नरवा हा घलो सुखाय लागथे।




नदी नरवा के पानी तो काम बुता के पानी आय, फेर पीये के पानी बर गरमी मा भारी समस्या हो लागथे। कुवां झरना अउ पीये के पानी के सब्बों स्रोत ह घलो सुखा लागथे। फेर आजकाल तो बोर बोरिंग के आय ले पीये के पानी बर घलो समस्या हा दूर होगे हे। गरमी म पीये के पानी हा गरम हो जाथे जेन हा हमर बर समस्या आय। आजकाल तो सहर के संगेसंग गांव मन म घलो कूलर फ्रिज के जमाना आगे हे। जेखर ले मनखे ठण्डा रहिथे, अउ पीये के पानी हा घलो ठण्डा। फेर फिरिज के पानी ला अच्छा नि माने जाय अउ येमा स्वाद घलो नि राहय।




इही गरमी मा ठण्डा पानी बर उपाय आय ‘‘करसी के ठण्डा पानी‘‘। जेखर ले गरमी म तन के संगे संग मन ह घलो जुड़ाथे। अउ करसी के ठण्डा पानी के अब्बड़ महत्ता हे। माटी के करसी के पानी ल षुध्द माने जाथे, जेमा वैज्ञानिक महत्ता घलो छुपे हावय। जेखर ले हमर प्यास हा बुझाथे अउ तन ह जुड़ा जाथे। एक ठन हाना घलो हे-

कुम्हार घर के सुघ्घर करसी, जेमा समाय बिग्यान के कहानी।
तन जुड़ाथे, मनो जुड़ाथे, जब पिबे तैं करसी के पानी।।
ये हाना के मतलब आय माटी के करसी ह कुम्हार घर बनथे। हमन भले नि जानन फेर येमा विग्यान समाय हे जेखर ले करसी के पानी हा ठण्डा रहिथे। प्यास के बेरा म तन ह तो करसी के पानी ले जुड़ाथे संगे संग ठण्डा पानी ले मन ह घलो जुड़ा जाथे। सिरतोन हमर जीवन म ‘‘करसी के ठण्डा पानी‘‘ के अब्बड़ महत्ता हे।

अमित कुमार
गाड़ाघाट-पाण्डुका (गरियाबंद)
7771910692



संघरा-मिंझरा

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