जड़कला मा करव योग रहव निरोग

हमर देस मा मउसम (रीतु)ल छे भाग मा बाटे हावय जेमा तीन मउसम गरमी,चउमास अउ जड़कला परमुख आय।जड़कला के मउसम हमर तन के अड़बड़ अकन परभाव बढ़ाय बर अच्छा होथे।ताकत, रकत, बिमारी ले लड़े बर प्रति रोधक। ए माउसम मा खाय पिये के बने बने जिनीस घलो मिलथे।लालभाजी,पालक, चनाभाजी, राखड़ी तिवरा भाजी आनी बानी के आयरन वाला भाजी खाना चाहिए। नरियर,चना,गुर अउ गरीब के बदाम फल्ली दाना ल जौन ए मउसम मा खाही ओला डाक्टर जगा जाय के जरुरत नइ परय।गाजर खाय के घलो बनेच फायदा हे। ये मउसम मा पसीना नइ निकले ले तन ले पानी सिराय के समस्या नइ होय। थकासी नइ लागय। खाय पिये के संगे संग खेले कूदे बर घलाव ये मउसम अड़बड़ बढ़िया रहिथे।बिहनिया ले रेंगे अउ दउड़े ले बच्छर भर ताकत रहिथे।फेर सबले बढ़िया ये मउसम ल योग प्राणायाम बर माने हावय।जड़कला मउसम के तीन महिना मा योग करे के फायदा सालभर मिलथे। अइसे तो योग ल रोज बिहनिया बिहनिया बच्छर भर करे जा सकत हे।




पांच तत्व के काया ल तीन तत्व रोजीना चाहिए। वइसने मन के कचरा ल निकाले बर योग के जरुरत होथे। योग करे से मन के कचरा निकल जाथे।एकर से मन के उदासी भगा जाथे।जुबान घलाव मीठ हो जाथे।सब डहार खुशी छा जथे।समाजबर कोनों नवा बुताकरे के ताकत अउ बुद्धि मिलथे। परिवार के संगे संग अरोस परोस संग बेवहार में नरमता आथे।सही विधिविधान ले जौन योग करथे ओला तो डाक्टर के जरुरत नइ परय ओकर बड़े ले बड़े बिमारी के नास हो जाथे।महर्षि पतंजली के लिखे योग सूत्र ह बिन पइसा के बड़का बड़का बिमारी ल दुरिहा देथे।




आजकल भारत के योग ल संसार भर के मनखे मन अपनावत हे। ऐला बहुत अकन संस्था मन अपन अपन ढंग ले बढ़ावत हे। योग प्रानायाम ह जिंनगी ल सुख अउ खुसी ले जिये बर तरीका घलाव बताथे। कतको झन योग ल आत्मा के परमात्मा ले मिलन कहे हे ।फेर ओकर रद्दा मा चलेबर नानम परकार के तरीका होथय। आज घरो घर मा बिवाद होना आम बात हो गे हावय। मनखे ह अपन जीनगी ल तनाव मा जीयत अउ राख करत हे। परमात्मा ह ओला खुस रहेबर अउ सबो आत्मा ल खुस राखेबर भेजे हावय फेर अपन तो खुस नइ हावय दूसर ल घलो दुख देवत हे।




आपस मा परेम बेवहार कमती होवत अउ नत्ता गोत्ता टूटत जावथ हे। मनखे के मन लालच,इरखा,कामना, घुस्सा मा बूढ़त जात हे।पहली निरोग लइका जनम धरय अब बिमारी धर के लइका जनम लेथे। एकर इलाज डाक्टर अउ बिग्यान करा नइ हे।ऐला योग के माध्यम ले बने करे जा सकत हे। हमर छत्तीसगढ़ सरकार ह स्वामी रामदेव के सलाहा मानके भारत मा पहिली योग आयोग के गठन करे हावय।छत्तीसगढ़ प्रांत ह योग आयोग गठन करईया पहिली प्रांत बनगे हावय।बिस्व विद्यालय मा योग पढ़ाय बर पाठ्यक्रम चालू होगे हावय। अब गांव गांव मा योग के माध्यम ले मनखेमन ल निरोगी जिनगी जीये के गुर सिखाय जाही जेकर बर योग मास्टर तियार करे जावत हे। अब ओ दिन दुरिहा नइ हे जब योग से मनखे निरोग होही।एकरे सेती कहे हावय। जड़कला मा करव योग अउ रहव निरोग।

हीरालाल गुरुजी”समय”
छुरा, जिला- गरियाबंद



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