पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : कुञ्ज बिहारी चौबे

हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार मन के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन –

चल ओ उठ ओ चरिहा धरके,
हम गोबर बीने ला जातेन ओ।
बिन लेतेन गोबर पातेन तौ,
अउ साँझ के घर चलि आतेन ओ।।

तैं हर बोलत काबर नहिं ओ बहिनी,
तैं हर काबर आज रिसाये हवस।
चुटकी -मुँदरी सब फेंक दिहे,
अंगना म परे खिसियाये हवस ।।

कुञ्ज बिहारी चौबे

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