जनतंत्र ह हो गय जइसे साझी के बइला

मोटा थे नेता, जनता खोइला के खोइला
बिरथा लागथे एला सँवारे के जतन,
जैसे अंधरा ल काजर अँजाई हे।।
करलइ हे भैया करलइ हे।

छोटे -छोटे बात के बड़े- बड़े झगड़ा हे
अपन -अपन गीत अउ अपन -अपन दफड़ा हे
मनखे-मनखे बीच खाई खना गे हे,
भाई के दुश्मन अब होगे भाई हे।।
करलइ हे भैया करलइ हे।

अंधरा प्रसासन अउ भैरा कानून हवय
गरीब के सुनवइयां इँहा भला कउन हवय
सब के सब लुटे बर घात लगाय बैइठे हे
बुड़ मरे घलो म नहकौनी देवइ हे।।
करलइ हे भैया करलइ हे।

महेश पांडेय “मलंग”
पण्डरिया जिला -कबीरधाम
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संघरा-मिंझरा

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