मई दिवस म बनिहार मन ल समर्पित दोहागीत

जय हे जाँगर जोस के, जुग-जुग ले जयकार।
सिरतों सिरजन हार तैं, पायलगी बनिहार।

खेत-खार नाँगर-बखर, माटी बसे परान।
कुदरा रापा हा कहे, मोर हवे पहिचान ।
लहू पछीना ओलहा, बंजर खिले बहार।1
सिरतों सिरजन हार तैं……

घाट-घटौंदा घरउहा, महल-अटारी धाम।
सड़क नहर पुलिया गढे़, करथव कब बिसराम।
सरलग समरथ साधना, सौ-सौ हे जोहार।2
सिरतों सिरजन हार तैं…….

ईंटा-पखरा जोरके, धर करनी गुरमाल।
खद्दर खपरा खोंधरा, मस्त मगन हर हाल।
सोसक सरई सोनहा, बनी-भुती खमहार।3
सिरतों सिरजन हार तैं…….

अन्न-धन्न दाता तहीं, सुख सब तोरे पाँव।
परछी परवा मा रहे, भूमिहीन हे नाँव।
मतलबिहा लहुटे सबो, भुलगे जग उपकार ।4
सिरतों सिरजन हार तैं…….

चिखला झुक्खा भोंभरा, जुड़ सरदी अउ घाम।
महिनत मा मोती मिले, चमचम चमके चाम।5
सिरतों सिरजन हार तैं…….

आलस अल्लर ओढ़हर, नइ जाने मजदूर।
भाग्य बिधाता सब सहे, कइसे हे मजबूर।
साधक सक्ती के अमित, सुख के भागीदार।6
सिरतों सिरजन हार तैं, पायलगी बनिहार।
जय हे जाँगर जोस के, जुग-जुग ले जयकार।

कन्हैया साहू “अमित”
शिक्षक-भाटापारा (छ.ग)
संपर्क-9200252055


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