मया के अंजोर

तोर मोर मया के अँजोर संगी,
निक लागय महकय अँगना खोर I
नाचय पतंगा आरा पारा,
चिरैया चहकय डारा डारा I
बांधे कईसन तै बंधना के डोर,
तोर बर मोर मया सजोर I
तोर मोर मया के अँजोर संगी I2I
पुन्नी के जईसे चमके चंदा,
सावन मा बरसे रिमझिम बरखा I
झर झर झरे मोती मया के,
जुरागे पीरा करके सुरता I
तोर मोर मया के अँजोर संगी I2I
हिरदे के अईना मा बसे हस मोर,
झुलत रहिथे चेहरा ह तोर I
पाखी बांधे जईसे जीव उड़ाथे,
तोर बिना कुछु नई सुहाथे I
मोर आंखी के तेंहा भोर,
चंदा सुरुज कस करे अँजोर I
बाँधे कईसन मोहनी के डोर,
तोर बर मोर मया सजोर I
तोर मोर मया के अँजोर संगी I2I

विजेंद्र वर्मा अनजान
नगरगाँव(जिला-रायपुर)


पारंपरिक गीत देवारी आगे