मोर देश के किसान

नांगर बईला धर निकलगे, बोय बर जी धान,
जय हो, जय हो जी जवान , मोर देश के किसान।

बरसत पानी, घाम पियास में जांगर टोर कमाथस,
धरती के छाती चीर के तैहा, सोना जी उपजाथस,
माटी संग में खेले कूदे, हरस माटी के मितान,
जय हो, जय हो जी जवान, मोर देश के किसान।

सुत उठ के बड़े फजर ले माटी के करथस पूजा,
तोर सही जी ये दुनिया मे नई है कोनो दूजा,
दुनिया भर के पेट ल तारे, तै भुईया के भगवान,
जय हो, जय हो जी जवान, मोर देश के किसान।

बोरे बासी संग पताल चटनी, अब्बड़ के ग सुहाथे,
होरे होरे त – त – त के बोली अब्बड़ मन ल भाथे,
तोर महिमा म
बढ़ भारी हे जग में, कतका करंव मैं तोर बखान,
जय हो, जय हो जी जवान , मोर देश के किसान।

धर्मेन्द्र डहरवाल “मितान”
सोहागपुर जिला बेमेतरा




चित्र: संतोष फरिकार‎

संघरा-मिंझरा

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