महतारी भाखा के मान करव




मनखे हा जनम धरे के बाद जउन भाखा पहिली सीखथे उही हा ओखर महतारी भाखा कहाथे। इही महतारी भाखा हा वो मनखे के जीयत-मरत समाजिक चिन्हारी होथे, एखर बिन वो हा अधूरा रथे। महतारी भाखा हा मनखे के असल अउ मउलिक पहिचान होथे। महतारी भाखा के जघा ला अउ कोनो दुसर भाखा हा नइच ले सकय। जइसे गाय के दूध हा कभू दाई के दूध नइ बन सकय वइसने महतारी भाखा के बरोबरी कोनो नइ कर सकय।

मनखे के सरी बिचार,बेवहार अउ बिकास के जरी ओखर अपनेच महतारी भाखा मा होथे। अपन महतारी भाखा मा एकमई अउ सँघरा सुमता मा रहे के गुरतुर गुन होथे। नान्हें लइका मन के पढ़ई-लिखई अउ सिक्छा हा ओखर महतारी भाखा मा होय ले लइका ला सरल,सहज अउ सहुलियत मिलथे अउ अपनेच लागथे। घर-परवार अउ सिक्छा के भाखा एकेच होथे ता कोनो लइका मन ला कोनो प्रकार के कोनो परशानी नइ होवय। लइका जउन ला दिन-रात,खेलत-खावत, रोवत-हाँसत,सोवत-जागत,देखत-सुनत हावय ओही ला सीखे-समझे मा सिध्दो परथे। जादा जलदी सीखथे घलाव। लइका के घर के भाखा अउ इस्कूल सिक्छा के भाखा एकमई होय ले सुफल होय के मउका हा जादा होथे। जब घर अउ इस्कूल के भाखा आने-ताने हो जाथे तब पढ़इया लइका मन ला अब्बङ़ मुसकुल होथे। अइसन मा लइका हा ना तो इस्कूल के भाखा ला बरोबर बने ढ़ंग ले सीख पावय ना घर के भाखा ला बने ढ़ंग ले बोल पावय। एहा खिचरी भाखा बन जाथे अउ अइसन भाखा हा मनखे अउ समाज बर,देश अउ दुनिया बर खतरनाक होथे। अइसन सिक्छा के चक्कर मा संस्कार हा पछुवा जाथे। लइका हा जइसे-तइसे सिक्छित हो जाथे फेर सुग्घर संस्कारी कभूच नइ बन पावय।

लइका हा महतारी के पेट भीतरी अपन महतारी भाखा ले संस्कार पाथे अउ इही भाखा मा अपन बिकास के रद्दा बनाथे। महतारी भाखा सीखे मा, समझे मा अउ गियान पाय मा सबले सरल होथे। लइका हा जउन भाखा मा रोथे उही हा ओखर असल महतारी भाखा होथे अइसन कतको बिद्वान मन के कहना अउ मानना हावय। भाखा हा भाव ले अउ भाव ले भाखा हा जुरे रथे। एला एक दुसर ले अलग नइ करे जाय। हमर भारत भुँईयाँ के सभियता मा भाखा ला महतारी के दरजा मिले हावय। ए प्रकार मनखे के जिनगी मा तीन झिन महतारी होथे। पहिली महतारी ओखर जनमभूमि, दूसर महतारी ओखर भाखा अउ तीसर महतारी ओखर जनम देवइया महतारी। इही तीन महतारी मन के मनखे हा जिनगी भर करजा खाय बइठे रथे। इंखर करजा उतारना सबो मनखे मन के पहिलावत अउ असल धरम होथे। ए महतारी मन के करजा ला अपन जिनगी मा जीते जी उतार दँय इही सबके पहिली करतब्य होना चाही।




पढ़ई-लिखई मा घलाव घातेच महत्तम होथे मनखे के महतारी भाखा के। समे समे मा सिक्छा के माधियम हमर महतारी भाखा ला बनाय बर बइठक, गोस्ठी,सम्मेलन अउ सरी उदिम होथे। अइसन सबो उदिम हा पइसा अउ समे के निरमामूल बरबादी भर होथे अउ कुछू मिलय ना जुलय। सरकर हा सरी उदिम करे के प्रयास करथे महतारी भाखा के बिकास अउ बचाव बर। बङ़का-बङ़का ताम-झाम घलाव करथे महतारी भाखा के प्रति मया देखाय अउ जताय बर। हमर जत्तीसगढ़ राज के महतारी भाखा अउ राजभासा छत्तीसगढ़ी हा हरय। नवा राज बनते साठ छत्तीसगढ़ सरकार हा छत्तीसगढ़ी ला सरकारी कामकाज करे के भासा बनाय बर एला राजभासा बना दीस हे। छत्तीसगढ़ी राजभासा के रखवार छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ला बना दीन हे सरकार हा। ए आयोग ला राजभासा के पालन-पोसन ला दाई-ददा बरोबर करे के जिम्मेदारी दे गे हावय। आयोग घलाव अपन समरथ हिसाब अपन छत्तीसगढ़ के जतन-पोसन मा लगे हावय। सरकार घलाव अपन सरी दल-बल ला छत्तीसगढ़ी भाखा के सेवा मा समरपित करे हावय। छत्तीसगढ़ी भाखा के बिकास के नाँव मा हर बच्छर करोङ़ो रुपिया ला पानी असन बोहावत हावँय।

छत्तीसगढ़ी भाखा के छतनार हा आज अतका सरकार के सरकारी उदिम ले घलाव कोचरावत हावय। ना कोनो विधानसभा मा,ना कोनो सरकारी सेवा ,ना कोनो दफतर मा छत्तीसगढ़ी भाखा ला मान-सम्मान मिलत हे। ना कोनो साहेब-बाबू,नेता-मंतरी मन अपन पोगरी बिचार अउ बेवहार ला राजभासा मा राखत हे। राजभासा हा हमर राज बर सादा हाथी बरोबर होगे हावय। एखर खरचा-पानी हा हर बच्छर सरलग सुरसा के मुहूँ बरोबर बाढ़तेच जावत हे। छत्तीसगढ़ी राजभासा आयोग बने ले थोरिक उमीद जागे रहीस हे के अब तो हमर महतारी भाखा के मान-मनउव्वल ला बाढ़ही। जउन उमीद ले एखर गठन ह़ोय रहीस हो वोहा आज आठ-नौ बच्छर मा घलाव पूरा होवत नइ दिखत हावय। ना कोनो कार्यालय मा, ना कोनो इस्कूल मा छत्तीसगढ़ी भाखा के बोलइया-बतइया हावँय। इस्कूल के पढ़ई-लिखई मा घलाव छत्तीसगढ़ी भाखा के ओतका महत्तम नइ हे जतका होना चाही। सरी देश अउ दुनिया भर मा प्राथमिक सिक्छा हा महतारी भाखा मा दे जाथे सिरिफ हमर ए राज मा छोङ़ के। कक्छा पहिली ले आठवी तक के एक ले चउदा बच्छर के लइकामन ला अपन सुरुवाती सिक्छा ला अपन महतारी भाखा मा पाये के मउलिक अधिकार हमर संविधान हा दे हावय। देश मा जइसन रास्ट्रभासा के हाल हा बेहाल हे वइसने हमर राजभासा के बुरा हाल हे। छत्तीसगढ़ी भाखा बर कोनो जीनिस के काँहीं कमी नइ हे। सासन हे, साधन हे अउ संसाधन घलाव हे फेर मन मा मान नइ हे अपनेच महतारी भाखा बर। सरी “सिस्टम” हा अंगरेजी के पिछलग्गा भागत हावय। अंगरेजी ला सफलता के गारन्टी बता के अंगरेजियत ला जबरन के मुङ़ पेलवा सरीक हमर मन के मुङ़ मा मङ़ावत देहें।

महतारी भाखा के मान-गउन बर सरकार हा नियम-अधिनियम बनाथे, अपन बिधायक अउ मंतरी मन ला छत्तीसगढ़ी मा गोठियाय बर चेताथे। राजभासा आयोग हा घलो साल मा दु-चार ठन सम्मेलन अउ बइठक कराथे,महतारी भाखा के किताब छपवाथे। इहां के दु-चार ठन समाचार पत्र मन हा हफ्ता मा एक दिन छत्तीसगढ़ी भाखा ला अपन मर गरजी हिसाब जघा देथे फेर एला पढइया अउ पोठ लिखइया नइ मिलय घलाव कहिथें। राजभासा आयोग हा प्राथमिक सिक्छा के पाठ्यक्रम ला छत्तीसगढ़ी मा लागू करे खातिर कक्छा पहिली ले आठवीं तक के किताब मन के हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी मा अनुवाद करे के झारा-झारा नेवता दे हावय। तभो ले ए सबो उदिम करे पाछू घलाव हमर राजभासा के मान-मरजाद हा दिनो-दिन गिरत जावत हे। हमर राजभासा ला हमर रास्ट्रभासा हिन्दी के नान्हें बहिनी अउ अंगरेजी के सउत अइसन मया मिलथे अपनेच राज मा फेर बाहिर के झिन पूछ। छत्तीसगढ़ी भाखा हा अपनेच घर मा बिरान असन बिमार परे हावय। एला ए दसा मा लाने के सबले जादा दोसी हमीं मन हा हरन। हमन अपन बोलचाल,बेवहार अउ बिचार मा अपन महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी के प्रयोग करे मा ढेरियाथन। पढहे-लिखे लइका-सियान मन छत्तीसगढ़ी मा गोठियाय-बताय मा लजाथें। छत्तीसगढ़ी भाखा ला बने पढ़े-लिखे छत्तीसगढ़िया मन हा गाँव,गवँई अउ गवाँर के भाखा समझथें।




आज हमला हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ला अपन अंतस मा इस्थान, मन मा मान देके खच्चित जरुरत हावय। सरकार के, मंतरी मन के, बिधायक मन के, साहेब-बाबू मन के, पढ़ई-लिखई अउ जन-जन के भाखा एकेच होना चाही। राजा अउ प्रजा के भाखा एकमई होना होही तभे बिकास के बूता हा सिध परही। घर के सियान ला अगर अपन घर में मान नइ मिलही ता पारा-गली,मोहल्ला मा वोला कोन पूँछही,मान देही? एखर सुरुवात हमला हमर ले ही करना परही। हमला अपन सरी काम-बुता,बिचार-बेवहार मा जादा ले जादा छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रयोग करना चाही। हमला हमर महतारी भाखा के रुप मा राजभासा के अधिकार मिले हावय एला हमला हथियार बनाना हे अपन कमजोरी,लचारी नइच बनाना हावय। सिरिफ इच्छा सक्ति के जरुरत हावय। एखर सुरुवात सबला अपन-अपन घर मा गोठ-बात महतारी भाखा मा करके करना चाही। आज सबले जादा जरुरी जीनिस वाट्सअप अउ फेसबुक मा छत्तीसगढ़ी भाखा के नब्बे परसेन्ट उपयोग करना चाही। अपन भाखा मा मान हे, सम्मान हे अउ सरी संसार भर के सुख हे,सुबिधा हे। आज अपन भाखा मा लाज मरे के नही काज करे के जादा जरुरत हावय। इही हमर महतारी भाखा के मान अउ मरजाद के चिन्हारी हरय के हमन अपन बेवहार मा,अपन बिचार मा कतका बगराथन,वोला बउरथन।

-कन्हैया साहू “अमित”
शिक्षक
मोतीबाङी~भाटापारा (छ.ग)
संपर्क ~ 9200252055



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