नरवा गरवा घुरवा बारी

नरवा गरवा घुरवा बारी योजना के चर्चा अभी पूरा देश में चलत हे। ए योजना ह छत्तीसगढ़ सरकार के महत्त्वपूर्ण योजना आय जेकर माध्यम ले गांव ल आत्मनिर्भर बनाय के उदीम होवत हे। कतको मनखे ल तो ए योजना ह समझ में घलो नी आय हे त पूछत रथे कि एकर ले का होही? गांव के विकास कइसे होही? फलाना-ढेकाना, अमका-ढमका वास्तव में नरवा गरवा घुरवा बारी ह कोनो नवा जिनीस नी होय। ए चारों ह छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ जनजीवन में समाहित धरोहर आय जेला जतने के उदीम ए योजना के द्वारा करे जावत हे। ए जम्मो ह गांव के चिन्हारी आय।तइहा के बेरा में गांव के मनखे के जिनगानी इंकरे भरोसा म चल जावत रिहिसे। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी घलो गांव ल आत्मनिर्भर बनाय के बात केहे रिहिसे। उंकर सपना रिहिसे कि गांव के मनखे ह अपन जरूरत के जम्मो जिनीस गांव में उपजाये अउ अपन ऊपर निर्भर रहय।हमर पुरखा ह गांधीजी के इही बात में अमल करके ए चारों के जतन करके सादा जिनगी बितावत रिहिन।

नरवा–  पहली मनखे ह गांव में खेती किसानी के बुता बर आजकाल कस आधुनिक साधन ल नइ बउरत रिहिसे। प्रकृति ले मिले साधन ह मनखे के जिनगी ल सरल अउ सहज बनावय। नरवा के जतन करे के अरथ हे पानी के जम्मो जलस्रोत ल बचाय के उदीम करना। जुन्ना बेरा में लोगन ह चउमास के सिराती में छोटे-छोटे नरवा-ढोंडगा मन ल बांध के पानी ल छेंकय।जे ह बड़ दिन ले निस्तारी अउ खेती-बाड़ी के बुता म काम आवय।पानी ल रोक के राखे ले गांव में जलस्तर ह बने रहय।इही नरवा के माध्यम ले गांव के मनखे ल मछरी कोतरी घलो मिलय। जे ह उंकर खान-पान में पौष्टिकता अउ आर्थिक बचत के काम करय।अब नरवा मन में स्टाप डेम बनाके पानी ल रोके के उदीम शासन के माध्यम ले करे जाथे। छत्तीसगढ़ के जम्मो मनखे ल माटी महतारी के प्रति अपन जिम्मेवारी ल समझके प्राकृतिक जलस्रोत के जतन ऊपर विशेष ध्यान देयके जरूरत हवय।

गरवा– एक समे म गरवा ह गंवई अउ किसानी के अधार रिहिसे।गरवा ह धार्मिक रूप से अउ किसानी बुता के सेती बड़ महत्व रखय। फेर धीरलगहा किसानी बुता में बाढत मसीन के उपयोग के सेती गरवा के महत्व सिरागे। अभी के बेरा म गरवा के दसा बड़ दयनीय हे।आज छत्तीसगढ़ के जम्मो गांव अउ साहर ह गरवा के सेती हलाकान हे। गांव में किसान ह खेती-बाड़ी में लवारिस गरवा के सेती नुकसान त साहर वाले मन गरवा के कारण सडक म होवत दुर्घटना के सेती हलाकान हवय। पहली किसानी के जम्मो काम बइला-गरवा के माध्यम ले होवय।नांगर जोतई, बेलन, दौंरी, बइला गाडी, छकडा गाड़ी जम्मो में बइला भंइसा ल बउरे। घर में गाय गरवा रहय त दूध, दही अउ घीव ह बारों महीना घरे म मिलय। जे ह घर के बहुत अकन बुता में काम आवय।समे बीतत गीस। मनखे के लालच बाढत गीस अउ ओहा ह गाय गरवा के चरे के जगा ल घलो नंगा डरिस।जेकर सेती हमर गाय गरवा ह हरहा होगे। अब वो भटकत रथे।इंकरे जतन करे खातिर शासन ह गौठान बनावत हे जिंहा लवारिस घूमत गरवा मन ल लानके रखे जही अऊ उंकर बर दाना-पानी के बेवस्था करे जाही। ये बढ़िया उदीम आय।

घुरवा- घुरवा घलो छत्तीसगढ़ के जनजीवन के महत्त्वपूर्ण हिस्सा हरय। जिंहा चार मनखे अउ गाय गरवा गुजर बसर अरही त उंहा कचरा होबे करही। इही कचरा ल सकेले बर घुरवा बनाय जथे गांव में।जिंहा किसानी बुता ले बचे कचरा, घर के बुता ले बचे कचरा अउ गाय गरवा के गोबर ल एक जघा सकेले जाथे। एखर से बढ़िया जैविक खाद बनथे जेहा खेती-बाड़ी में बड़ काम आथे। रसायनिक खातू ह मनखे के स्वास्थ्य बर हानिकारक हवय। जैविक खाद ल बउरे में कोनो नुकसान नी होवय अउ ऊपज घलो तगड़ा होथे। फेर जैविक खाद के छिते ले उत्पादित सब्जी अउ फल ह घातेच मीठाथे। बडे़-बडे साहर मन में जैविक खातू ले उपजाय सागभाजी अउ फल ह बड़ माहंगी बेचाथे। अइसने उदीम करके किसान भाई मन अपन आर्थिक स्थिति ल सुधार सकत हे।

बारी- जुन्ना बेरा में गांव के मनखे मन अपन पूरति साग भाजी के बेवस्था अपन घर के बारी ले कर लेवय।जम्मो घर में छोटकुन कोला बारी रहय। जिंहा मखना,तुमा,रखिया,तोरई,करेला अउ खीरा के नार छछले रहय।बारी म मुरई, भांटा, चेंज भाजी, जरी, पताल अउ अमारी भाजी जगाय रहय।बारी ह धनिया अउ चंदैनी गोंदा के फूल के खुशबू म काहरय।धान मिसाई के समे बारी के चिरपोटी पताल के चटनी अऊ अंगाकर रोटी खाय के सुख जेमन पाय होही उही मन तइहा के सवाद ल बता सकथे। बारी ह गांव के पौष्टिक जरूरत ल पूरा करे में बड़ योगदान देवय।धीरे-धीरे मनखे के अलाली अउ जंगल के कटाय ले गांव-गांव में बाढत बेंदरा के अतलंग के सेती बारी नंदागे।अब बारी ल फेर पुनर्जीवित करे के जरूरत हे।जेकर ले आर्थिक समृद्धि आही अउ मनखे ल बाढत महंगई ले मुक्ति मिलही।

आज जम्मो छत्तीसगढ़िया अउ छत्तीसगढ़ ल आत्मनिर्भर बनाय के जरूरत हवय। अगर हमन अपन ये जुन्ना धरोहर मन के जतन करबो त हमन ल कभू काकरो आगू म हाथ लमाय के नौबत नी आय।
जय छत्तीसगढ़!!!

रीझे “देवनाथ”
टेंगनाबासा (छुरा)

संघरा-मिंझरा

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