सुरता : प्रेमचंद अउ गांव

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित के अनमोल रतन आय। उंकर लिखे कहानी अउ उपन्यास आज घलो बड चाव से पढ़े जाथे। उंकर कहानी ल पढत रबे त अइसे लागथे जानो मानो सनिमा देखत हैं। उंकर कहानी के पात्र के हर भाव ल पाठक ह सोयम महसूस करथे। गांव अउ किसान के जइसन चित्रण उंकर कहानी म पढ़े बर मिलथे वइसन दूसर कहानीकार मन के कहानी म देखब म बहुत कम अथे। गांव ल संउहत गांव बरोबर उही मन कागज म उतारे हे।

नानुक रहंव त बड संउक लागे महूं अलगू चौधरी अउ जुम्मन शेख वाला बइठका म जतेंव किके। अतेक सिरतोन लगे उंकर कहानी मन ह। दू चार ठन कहानी तो अंतस म समा गे हवय।

पंच-परमेश्वर कहानी म जुम्मन शेख अउ अलगू के कहानी ह कतेक सुग्घर हे। गांव के मनखे के छोटे-मोटे समस्या अउ झगरा ल आज घलो उही ढंग ले चार सियनहा मन मिलके समाधान करथें। हिंदू-मुस्लिम मितानी ह वइसनेच चलत हे। हमर गांव म घलो वइसने महापरसाद बधे हवय एक झन ह! नियाव के रसदा म नता गोता ल बीच म नी लाना चाही ए सिक्छा मिलथे पंच-परमेश्वर कहानी ले।

ईदगाह कहानी में गांव के नानुक लइका हामिद के जिम्मेदार सियनहा बरोबर बिचार के बड सुग्घर वर्णन करे हे प्रेमचंद ह। नानुक हामिद अपन खेल-खिलौना अउ खई-खजाना खाय के बिचार ल तियाग के अपन डोकरी दाई के जरूरत ल सुरता राखथे। उंकर हांथ रोटी रांधत मत जरय किके चिमटा लानथे।कतेक बड़े सिक्छा हामिद के माध्यम ले कहानीकार ह दे हवय।

‘परीक्षा’कहानी मे हाकी के खेल के अतिक बढ़िया वर्णन करे हे जानो-मानो लेखक घलो हाकी के खिलाड़ी हरय। कहानी ल पढबे त अइसे लागथे कि महूं वो खेल ल देखे बर बइठे हंव। फेर ए कहानी म मनखे ल परखे के जेन गुन बताय हवय वो ह अद्भुत हे। सुजानसिंह ऊपरी गुन नहीं बलुक अंतस के गुन जेमा आन बर दया-मया अउ सहयोग के भावना रथे ओला महातम देथे।

‘बूढी काकी’ कहानी म एकझन डोकरी दाई अउ ओकर नतनीन के मया के बड सुग्घर वर्णन करे हे कहानीकार ह। बुढापा के तकलीफ अउ मुंह मे सुवाद पाय के लालच कइसे होथे ए कहानी म देखे बर मिलथे। उम्मर बाढथे ताहन बेटा बहू के बेवहार सियनहा मन के संग कइसे बदल जथे।ए कहानी म बड मार्मिक विवरण हवय। सियान मन ल मान सम्मान देय के सिक्छा ए कहानी ले मिलथे।

‘कफन’ कहानी मे दूझन कोढिया बाप-बेटा के जेन मनोवैज्ञानिक ढंग ले चित्रण करे हे उंकर बर लेखक ल परनाम हवय। मनखे के मनोभाव कइसे बदलथे अउ ओहा अपन आप ल दोषमुक्त करे बर कैसे मनगढ़ंत बात बनाथे ए कहानी म पढ़े बर मिलथे। दूनों कोढिया के सेती एकझन छेवरिया ल मरे के बाद कफन तको नी मिल सकय।

प्रेमचंद ह किसान के दुर्दसा ल देखके बड बियाकुल रहय। ओहा अपन कहानी के माध्यम ले घेरी बेरी किसान के हालत ल समाज के आगू म रखे के परयास करय। गांव अउ गांव के किसनहा के हालत के सबले जोरदार वर्णन पढ़े खातिर मिलथे ‘पूस की रात’ कहानी मे। हलकू अउ झबरा नांव के कुकुर ह कभु नी भुलावय। कतिक मिहनत ले किसान ह अन्न उपजाथे अउ ओला सेठ साहूकार मन कइसे हडप लेवय तेकर वर्णन बड सुग्घर ढंग ले करे हवय मुंशी जी ह।हाडा कंपात जाड मे हलकू के हलाकानी ल पढत रबे त खुद के देंहे घलो घुरघुराय लागथे।

कुल मिलाके जेन मनखे ह भारत देश के गांव ल नी देखे होही। गांव के रहन-सहन अउ रीति रिवाज के बारे म नी जानत होही ओहा मुंशीजी के कहानी ल पढ़के जान डरही। गांव के किसान के हालत अभी घलो खराब हवय। देश म बाढत किसान आत्महत्या के मामला ह एकर सबूत आय। गांव के जेन चित्रण मुंशी प्रेमचंद ह अपन कहानी म करे हवय अब ओकर रुप म बड बदलाव आगे हे। गांव के मनखे ह घलो सहर के रंग म रंगे हे। गांव-गांव टावर खडे़ होगे हे। घर ले कोठा नंदागे हे। गाय,गरवा,नदिया-नरवा के बिनास होवत हे। मनखे ह अपन लालच के सेती जम्मो जीव-जंतु के हक ल मारत हे।

भगवान करे मुंशीजी के कहानी वाला मयारूक गांव फेर लहुटे फेर ओमा गरीबी अउ दुख झिन रहय।

रीझे ‘देवनाथ’
टेंगनाबासा(छुरा)
8889135003

संघरा-मिंझरा

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