पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : प्यारेलाल गुप्त

हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया अउ श्रीमती सरला शर्मा ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार मन के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन ––

झिलमिल दिया बुता देहा

गोई, पुछहीं इन हाल मोर तौ, धीरे ले मुस्क देहा।
औ आँखिन आँखिन म उनला, तूं मरना मोर बता देहा।।

अतको म गोई नइ समझें, अउ खोद खोद के बात पुछैं।
तो अँखियन म मोती भरके, तूं उनकर भेंट चढ़ा देहा।।

अतको म गोई नइ समझें, अउ पिरीत के रीत ल नइ बूझें।
एक सुग्घर थारी म धरके, मुरझाए फूल देखा देहा।।

गोई, कतको कलकुत उन करहीं, बियाकुल हो हो पाँ परहीं।
तौ काँपत काँपत हाँथ ले तूं, झिलमिल दिया बुता देहा ।।

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घर उज्जर लीपे पोते , जेला देख हवेली रोथे
सुग्धर चिकनाये भुइंया , चाहे भात परोस ले गुइन्या
कोठा मं भैंसा गरुवा , अंगना मं तुलसी घरुवा
लकठा मं कोला बारी , जिंहा बोथन साग तरकारी
ये हर अन्न पूर्णा के छाँव , हमर कतका सुग्धर गांव ।
हमर कतका सुग्घर गांव जइसे लछमी जी के पांव ….

Pyare Lal Gupt

  • प्यारेलाल गुप्त

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