रफी के छत्तीसगढ़ी गीत

रफी साहब….. हिंदी सनिमा जगत के बहुत बड़े नाम आय। जिंकर गुरतुर अउ मीठ अवाज के जादू के मोहनी म आज घलो जम्मो संगीत परेमी मनखे झूमरत रथे। उंकर अवाज के चरचा के बिना हिंदी सनिमा के गीत-संगीत के गोठ ह अधूरहा लागथे।
जम्मो छत्तीसगढ़िया मन भागमानी हवय के अतिक बड़े कलाकार ह हमर भाखा के गीत ल घलो अपन अवाज दे हवय। रफी साहब के अवाज म छत्तीसगढ़ी गीत सुनना अपन आप म बड गौरव के बात आय।

बछर 1965 के आसपास म जब छत्तीसगढ़ी सनिमा जगत के दादा साहेब मनु नायक जी ह पहिली छत्तीसगढ़ी फिलीम बनाइन त ओमे ओहा हिंदी सनिमा जगत के बड़े-बड़े नामही कलाकार मन से गीत गवाय रिहिन। “कहि देबे संदेश” नाव के ए फिलीम म रफी साहब के अवाज म “तोर पैरी के झनर-झनर” अउ “झमकत नदिया बहिनी लागे” ह जीव ल जुडा देथे। खास करके “तोर पैरी के झनर-झनर” गीत म गीत के पहिली के अलाप अउ गीत म उंकर अवाज के पाछू म दंउडत बांसरी के स्वर।
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ये फिलीम मे डॉ हनुमंत नायडू ‘राजदीप’ के गीत अउ मलय चक्रवर्ती जी के सुग्घर संगीत रिहिसे। ए फिलीम के बाद बछर 1971 मे “घर-द्वार” नाव ले दूसर छत्तीसगढ़ी फिलीम अइस। यहू फिलीम के गाना म रफी साहब ह अपन अवाज के मंदरस घोरे हे। छत्तीसगढ़ के नामही साहित्यकार हरि ठाकुर के लिखे गीत ह जमाल सेन के संगीत म बनेच धूम मचाय रिहिस। ए फिलीम म रफी साहब के अवाज म “गोंदा फूलगे मोर राजा” गाना ह बड सुग्घर लागथे जेला उन बड़ मस्ती के साथ गाए हवय।एकर अलावा एमा ”आज अधरतिहा” अउ ”सुन सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे” ह घातेच मया पाइस। अतेक साल बीते के बाद घलो सुन सुन मोर मया पीरा के संगवारी गीत ह छत्तीसगढ़ के तीन ठ नामही छत्तीसगढ़ी लोककला मंच म अपन जादू बरकरार रखे हवय। ए गीत ल जब गुनगुनाबे तब गोड़ ह थिरके लागथे।

जेन मिहनत अउ धन लगाके छत्तीसगढ़ी फिलीम ल ओ समे के कलासाधक मन बनाय रिहिन ओ मुताबिक फिलीम ह बेपार नी कर पाइस तेकर सेती छत्तीसगढ़ी सनिमा के सफर ह उही मेर थमगे। नइते अउ कतको अकन गीत आज छत्तीसगढ़ के धरोहर रतिस।रफी साहब ल उंकर पुण्यतिथि के बेरा मे नमन हवय…

रीझे ‘देवनाथ’
टेंगनाबासा (छुरा)

संघरा-मिंझरा

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