राखी

छन्न पकैया छन्न पकैया,पक्का हम अपनाबो।
नइ लेवन अब चीनी राखी,देशी राखी लाबो।1

छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी आँसों आबे।
हमर देश के रेशम डोरी,सुग्घर तैं पहिराबे।2

छन्न पकैया छन्न पकैया, सावन आय महीना।
हमर देश के राखी ले के,पहिरव ताने सीना।

छन्न पकैया छन्न पकैया,चलन विदेशी छोड़ी।
किसन सुभद्रा जइसे भैया,राहय सब के जोड़ी।

छन्न पकैया छन्न पकैया,राखी कीमत जानौ।
मया बँधाये बहिनी मन के,येला तुम पहिचानव।5

छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी भेजे राखी।
सरहद मा भाई मन पहिरे,देवत हे सब साखी।6

छन्न पकैया छन्न पकैया,ये तिहार हे पावन।
बहिनी जब पहिरावय राखी,लागय जी मनभावन।7

अजय ‘अमृतांशु’
भाठापारा

संघरा-मिंझरा

Leave a Comment