छत्तीसगढ़ी ल पोठ करे बर अपन पढ़ईया चाही

छत्तीसगढ़ी के व्याकरण के किताब जब हिन्दी ले पहिली के आये ह त ये हा ये बात ला प्रमाणित करे बर अपन आप मा पर्याप्त हे के छत्त्तीसगढ़ी अपन आप मा कतका सक्षम हे । कोनो भी भाखा ला एक भाषा के रूप मा तभे जाने जाही जब ओ भाषा के बोलईया, लिखईया अउ पढईया मन के संख्या एक बरोबर होवय ।

छत्तीसगढी़ बोलईया मन के तइहा ले के आज तक के कोनो कमी नई होय हे । आज के छत्तीसगढ़ अउ तीर-तखार के राज्य मन के लकठा के रहईया मन छत्तीसगढ़ी बोलत आवंत हें । छत्तीसगढ़िया मन जीये-खाय बर पूरा भारत मा फइल गे हे जेखर ले छत्तीसगढ़ी बोलईया मन घला फइल गे हे । इहां तक के कोनो-कोनो देश मा घला छत्तीसगढ़ी बोलईया होंगे हें। छत्तीसगढ़ी बोलईया मन संख्या के हिसाब ले कोनो कम नई हे । कई राज्य अउ कई देश के भाषा बोलईया मन के संख्या ले जादा छत्तीसगढ़ी बोलइयामन के हे ।

छत्तीसगढ़ बने के बाद ले छत्तीसगढ़ी भाषा के आंदोलन तेज होय हे जेखर परिणाम छत्तीसगढ़ी के राजभाषा घोषित होना होइस । छत्तीसगढ़ी के राजभाषा घोषित होय के बाद ले छत्तीसगढ़ी भले आज तक राज-काज के भाषा होय बर संघर्ष करत हे फेर अब छत्तीसगढ़ी धीरे-धीरे व्यापार-व्यवहार के भाषा बनत जात हे । पहिली रायपुर जाके छत्तीसगढ़ी बोलन त दुकानदार मन देहाती कहँय अब आघू ले छत्तीसगढ़ी बोलथें । बड़े-बड़े आफिस मा घला अब बिना संकोच के छत्तीसगढ़ी बोलत हें । नेता-मंत्री मन घला विधानसभा मा छत्तीसगढ़ी बोलंय के मत बोलयं जनसभा मा जरूर छत्तीसगढ़ी बोलत हें । जेन छत्तीसगढ़ी पहिली गाँव-देहात के भाखा रहिस आज शहर-पहर के घलो भाखा होत जात हे । ये प्रकार ले छत्तीसगढ़ी बोलईया मन के संख्या दिन दोगुनी रात चौगुनी होवत हे ।

छत्तीसगढ़ी कथा कहानी मन वाचिक परंपरा ले आघू रेंगत रहिन ये बात ये बताथे के छत्तीसगढ़ी ला लिखे के कमी रहिस होही । फेर छत्तीसगढ़ी व्याकरण के लिखित होना येहूँ बात ला सि़द्ध करथे के छत्तीसगढ़ी ल घला लिखे जा सकथे । छत्तीसगढ़ी के पहिली कहानी ला हिन्दी के पहिली कहानी मानना अउ छत्तीसगढ़ी व्याकरण ला हिन्दी के व्याकरण ले पहिली के मानना छत्तीसगढ़ी के लिखित रूप ला घला सबल करत हे । हाँ ये बात ला स्वीकार करे जा सकत हे के छत्तीसगढ़ी मा लिखईया मन के पहिली कमी रहिस होही फेर लिखईया नई रहिस हे अइसे कभू नई होय हे । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के शांतिपूर्ण आंदोलन जब ले चलिस तब ले छत्तीसगढ़ी लिखईया मन घला बाढ़त गेइन । छत्तीसगढ़ राज्य बने के बाद तो येमा बनेच इजाफा आइस । छत्तीसगढ़ी राजभाषा बने के बाद ले छत्तीसगढ़ी मा लिखईया मन के संख्या मा एकदम से बढ़ोत्तरी होय हे । जेन मनखे ला बरोबर छत्तीसगढ़ी बोले ला नई आवय, जेखर घर मा छत्तीसगढ़ी नई चलय तेनोमन अब छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार बाजे लगिन । राज्य के लगभग सबो समाचार पत्र हा छत्तीसगढ़ी बर अलग से जगह दे लग गे हें मड़ई, चौपाल, पहट, अपन डेरा जइसे पृष्ठ मा छत्तीसगढ़ी सरलग छपत हवय । दृष्य मिडिया मा घला छत्तीसगढ़ी छपत हवय । सोशल मिडिया मा दिन-रात छत्तीसगढ़ी चलत हवय । नंगत ले छत्तीसगढ़ी मा लिखे किताब आवत हे । गुरतुर गोठ, ‘सुरता, साहित्य के धरोहर’ जइसे वेबसाइट घला छत्तीसगढ़ी ला लगातार छापत हवय । कोरी-खइखा छत्तीसगढ़ी ब्लॉग घला छत्तीसगढ़ी मा हवय । आज के स्थिति मा छत्तीसगढ़ी मा लिखईया मन के संख्या आन भाषा मा लिखईया मन के संख्या ले कोनो कम नई हे । नवा-नवा लइका मन घला अब दिन-ब-दिन छत्तीसगढ़ी लिखत हें, लिखईया जादा होय के कारण ही अब छत्तीसगढ़ी के मानकीकरण के मांग चलत हे । छत्तीसगढ़ बने के बीसे साल के अंदर छत्तीसगढ़ी मा लिखे किताब के खरही गंजागे हे ।

जब छत्तीसगढ़ बोलत हें, छत्तीसगढ़ी लिखत हें त छत्तीसगढ़ी पढ़त घला होहीं अइसे कोनो भी कहि सकत हें । फेर निखालिस छत्तीसगढ़ी बोलईयामन ला कहूँ छत्तीसगढ़ी पढ़े ला कहिके तो देख ओखर माथा चकरा जथे, अइसे नई हे के ओला पढ़े ला नई आवाय ओला पढ़े ला आथे फेर ओला छत्तीसगढ़ी बोलना अउ सुनना बने लगथे, ये पढ़ई बने नई लगय । रोज के पेपर पढ़इया मन घला पेपर के छत्तीसगढ़ी पत्ता के शीर्षक ला लेह-देह के पढ़ के आघू पलट लेथें ये प्रकार ले छत्तीसगढ़ी अपन एक बड़े वर्ग ले पाठक बर तरसत हे । येही कारण के अतकाजड़ छत्तीसगढ़ मा छत्तीसगढ़ी किताब बेचाये के एक ठन दुकान नई हे । लोगन ‘छत्तीसगढ़ ला तो पढ़ना चाहथें फेर छत्तीसगढ़ी ला पढ़ना नई चाहंय ।’ छत्तीसगढ़ी पढ़त कोन हे जेन छत्तीसगढ़ी मा लिखत हे, जेन अपन आप ला छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मानत हे या जेन साहित्यकार होना चाहत हे । येहूँ अतका आंगा-भारू हे के अपने लिखथें, अपने छपवाथें अउ अपने पढ़थें । दूसर के छपे ला या तो पढ़बे नई करंय या सरसरी निगाह ले देख के पढ़ ढरेन कहिके डकार भर लेथें । साहित्यकार के सोला आना मा के चउदा आना निखालिस कवि हें, किताब छपवाथें अउ एक-दूसर ला फोकट मा बांट देथे, फेर ओहूँ फोकट के किताब ला पढ़े बर कोखरो मेरा चिटुक भर बेरा नई हे । ये किताब मन घर के पठेरा मा धुर्रा-खात दियार ला बलावत रहि जाथें । सोषल मिडिया मा जतका वाह-वाह के ढेर लगथे ओखर आधा मनखे मन घला ओ छत्तीसगढ़ी रचना के आधा भाग ला घला पढ लेइन त बहुत हे ।

आम छत्तीसगढ़ी भाखा के मनखे मन ला केवल ओही छत्तीसगढ़ी गीत-कविता के सुरता हे जेन ला ओमन कान ले सुने हें । येही कारण हे ओमन केवल ओही भर मन ला कवि मान बइठे हे जेखर मेरा बोले के सुग्घर कला हे जेखर ला ओमन मंच मा सुनत हे । ओमन ये बात ले अनजान कस लगथें के जेन मंच मा नई आवय तेनो मन कवि हे, कतको मंची कवि ले श्रेष्ठ कवि हे जेखर मूल्यांकन तभे होही जब ओला पढ़े जाही ।

छत्तीसगढ़ी भाषा ला समृद्ध बनाये बर येखर बोलईया, सुनईया, लिखईया अउ पढ़ईया सबो के बराबर विकास होवय । कोनो भी साहित्य के मूल्यांकन तभे न होही जब होखर कोनो पाठक होही । पाठक सीमित होही त मूल्यांकन घला आंशिक होही । छत्तीसगढ़ी भाशा राज-काज, व्यवहार के भाषा तभे हो सकत हे जब ओखर पाठक होही ।

छत्तीसगढ़ी के मान-सम्मान बर, येखर विकास बर, छत्तीसगढ़ी पढ़ईया मन के ओतके जरूरत हे जतका कोनो धंधा-पानी के बाढ़ बर ग्राहक । जेन छत्तीसगढ़ी प्रेमी मन छत्तीसगढ़ी आंदोलन के झंड़ा बरदर हे, जेखर अंतस मा अपन भाषा बर मया हे, जेन छत्तीसगढ़ी वाचिक परंपरा ला लिखित रूप मा लाये के अदम साहस करें हें ओही मन ला अब येखर पढईया बनाये के घला उदिम करना चाही । छत्तीसगढ़ी लिखईया भर नहीं, पहिली पाठक घला होना चाही । येखर सुरवात अपने आप ले करना चाही जइसे खुद ला एक छत्तीसगढ़ी लिखईया बनायें हें ओइसने पहिली अपन आप ला एक छत्तीसगढ़ी पढ़ईया घला बनावँय । अपन तीर-तखार के संगी मन ला छत्तीसगढ़ी पढ़े बर प्रोत्साहित करँय । जतका जोर-शोर से येखर स्कूली पाठ्यक्रम मा शामिल करे के मांग करत हन ओतके येला पढ़े बर घला लोगन मा जन-जागृति लाये के जरूरत हे । जहां जनसमर्थन ऊहां सरकार ला पाछू आवब मा चिटको देरी नई लगय । आज छत्तीसगढ़ी के गोहर ला सुने के जरूरत हे के- ‘मोला बोलईया-सुनईया, लिखईया के संगे-संग पढ़ईया घला चाही ।’

रमेशकुमार सिंह चौहान

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