रोवा डारिन रियो म

31 वाँ ओलम्पिक खेल अपन सतरंगी छटा बिखेर के खतम होगे। ब्राजील के रियो डी. जेनेरियो साहर के मराकाना स्टेडियम म ए खेल के आयोजन बड़ धूमधाम से होइसे। एकर समापन के घोसना अंतरास्ट्रीय ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष थामस चाक हँ करिस हे। ए खेल हँ 5 अगस्त से 21 अगस्त तक 16 दिन ले चलिस हे। जेमा 42 खेल सामिल रिहिसे। एमा 205 देस के अंदाजन 11000 खेलाड़ी मन अपन भागीदारी निभइन हे।
अब 32 वाँ ओलम्पिक खेल सन 2020 म जापान के टोक्यो साहर म होही। पुराना जमाना म ये खेल हँ ग्रीस माने यूनान देस के राजधानी एथेंस म सन 1896 म पहिली बार आयोजित होइसे। ओलम्पिया नाम के पर्वत में खेले गे रिहिसे तेकर पाए के एकर नाम ओलम्पिक परगे। एमा पहिली सेना के सैनिक अउ घुड़वसवार मन भाग लेवँय। जेमा जितैया के यसगान करके सम्मान करे जावय। अब तो ये हँ खेल अउ खेलाड़ी के महाकुंभ होगे हवय।
जब खेल के नदिया बोहावत रहिथे त सबो झन आसरा के पुल उपर बइठे दावा के गरी खेलत रहिथे। ए दफे हम अतेक मछरी पकड़बोन। खेल खतम ताहेन चुकुम। भागे मछरी जाँघ अस रोंठ। तब उन खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे कस किस्सा एक दूसर उपर दोसारोपन अउ खामी निकालना सुरू कर देथे।
जबकि खानगी उही मन निकालथे जिन्कर तीर जौहर देखाए के जाँगर नइ होवय।
ए दफे हमार देस ले 119 खेलाड़ी रियो गए रिहिन। जेमा 44 महिला रिहिन हे। उन 44 महिला मिलाके कुल 119 खेलाड़ी के बीच सिरिफ दू झिन महिला मन भर पदक जीते सकिन। जबकि 15 खेल म 117 अउ खेलाड़ी मन भाग लेके अपन भाग अजमाए रिहिन हे। ए दफे हमर देस हँ एक चाँदी अउ एक काँसा के मात्र दू मदक देके पदक तालका के 67 वाँ स्थान म चमचमावत हवय। पदक खातिर तरसत भारत के नाक ल बचइया उन दू महिला खेलाड़ी मन के नाम हे -साक्षी अउ सिंधु।
हरियाणा के महिला पहलवान साक्षी मलिक हँ काँसा के पदक पाहस त हैदराबाद के पी.वी.संधु हँ महिला बैडमिंटन म रजत पदक जीतिस।
हालाके हमर देस ल इन दूनो के संगे संग अभिनव बिन्द्रा , गगन नारंग, जीतू राय, दीपिका कुमारी, योगेस्वर दत्त, संदीप तोमर, सीमा पुनिया, बबीता फोगट, सानिया मिर्जा, ललिता बाबर, दत्तू भोकानल, अतानु दास ले भारी भरकम आसरा रिहिसे। फेर इन सबो निरासा म बोर डाारिन।
साइना नेहवाल ल चोट लगगे। विजेन्द्र सिंह के प्रो-बाक्सिंग म जाए ले बाक्ंिसग के दावेदारी के दीया तको चुमुक ले बूझागे। नरसिंह यादव काण्ड हँ देस बर कलंक के टीका बन गे।
2008 के बीजिंग ओलम्पिक म तो हमन 1 सोना अउ 2 काँसा मिलाके तीने पदक जीते रहेन। चार साल पहिली 2012 के लंदन ओलम्पिक म भारतीय खेलाड़ी मन 2 चाँदी अउ 4 काँसा मिलाके छै पदक जीतिन त हमर आसरा ए दफे जादा बाढ़ गे रिहिसे।
हालाके महिला जिमनास्टिक दीपा कर्माकर हँ बाल्ट फाइनल म पहुँच के इतहास रचिस। टेनिस म सानिया -बोपन्ना के जोड़ी हँ 4 थाँ स्थान म रहिस। एथलिट्स म ललिता बाबर 3000 मीटर स्टीपलचेंज म 32 साल बाद फाइनल म पहुँचिस। एकर पहिली पी.टी.उषा हँ 1984 के लास एंजिलिस म फाइनल पहुँच के 4 था आए रिहिसे। ओइसने हमर रास्ट्रीय खेल हाॅकी हँ 36 साल बाद क्वार्टर फाइनल म पहुँचिस हे। निसानेबाज अभिनव बिंद्रा 10 मी. एयर पिस्टल म 4 थाँ अउ जीतूराय 10 मी. एयर पिस्टल म 8 थाँ, तीरंदाज अतानुदास हँ क्र्वाटर फाइनल म, मुक्केबाज विकास कृस्णन यादव क्र्वाटर फाइनल,महिला गोल्फर अदिति अशोक 41वाँ, किदांबी श्रीकांत हँ बैडमिंटन के क्र्वाटर फाइनल म पहुँच के कम से कम भविस बर एक आसरा के किरण तो जगाइस।
एकर मतलब होथे के हमर देस के प्रदर्सन म सुधार होए हे। फेर संगे संग इहू आसंका हँ मुड़ उठाके अंगरी देखाथे के जतका हमर अबादी बाढ़िस हे ओतका हमर खेलइया मन के अबादी बाढ़िस के नहीं। जुवाब मिलथे- नहीं।
अबादी भर के बाढ़े ले खेलाड़ी नइ बाढ़य, खेलाड़ी भर के बाढ़े ले पदक नइ मिल जाय।
स्टेडियम भर के बनाए ले खेलाड़ी नइ बनय बल्कि मैदान म पसीना बोहवाए ले बोल्ट अउ फेलप्स पैदा होथे।
ओलम्पिक म पदक तभे मिलथे जब खेलाड़ी नौकरी नहीं भल्कि पदक पाए खातिर खेल के मैदान म उतरथे।
आज हम दुनिया म तेज गति से बिकास करइया देस के रूप म अपन पहिचान बनाए हवन। हमर देस के सासन म अलग से खेल बिभाग हे। खेल मंत्री हे। एकर छोड़ अइसे कइठो खेल संघ हे जेमन खेलेच खातिर बनाए गे हवय। इन सब के बादो आखिर म हमर अइसन हालत काबर होइस। ए हँ मुड़ धरके गुने के बिसे हरे।
कथे के गियान पाए बर बने असन गुरू के जरूरत परथे ओइसने खेल म पदक पाए खातिर खेल गुरू के जरूरत परथे। अइसे खेल गुरू जेन हँ चाणक्य सहीं बुधिमान अउ द्रोणाचार्य बरोबर लक्ष्य साधक होवय।
रियो ओलम्पिक म हमार ले नान्हे नान्हे अउ सुबिधाविहीन देस के खेलाड़ीमन आगू बढ़ गे। सबले बड़े आस्चर्य के बात ए हे के इहीच ओलम्पिक म 49 सोन के पदक संग 121 पदक लेके सर्वश्रेस्ठ प्रदर्सन करइया अमेरिका तीर न तो कोनो खेल बिभाग हे न कोनो खेल मंत्री।
उन्कर बर एकर ले गरब के बात अउ का हो सकथे।
अउ हमार बर ? हमन तो सुख दुख समभाव सुभाव- सोच वाले अन। हमन ला का फरक परना हे। सुख म गिजगिजा लेबोन अउ दुख म दाँत निपोर लेबोन। हम तो लाज सरम म घलो गरब – गुमान खोज -निमार लेथन।
एकर मतलब इही होइस के खेल म खुल्लम – खुल्ला गजब बड़ खेल होवत हे। खेल म होवइया खर्चा हँ सरी उदीम के तामझाम म खर्चा होवत हे। अउ जब सरकार अउ बिभाग के इही रवइया रिही त खेलाड़ी तको काबर अच्छा प्रदर्सन करही। उहू मन अपन एके उद्देश्य बनाही – सरकारी नौकरी।
खेल के भरोसा नौकरी मिल गे ताहेन साठ साल पक्का।
खैर ए सब सिकवा सिकायत ल छोड़के हमला हार से सबक लेना चाही।
मनखे जब तक नइ गिरय उठे बर नइ सीखय । जेन गिरके उठथे तेने हँ दउँड़ सकथे। जेन गिरे म हार नइ मानै उही हँ दउँड़ सकथे। एक दिन असमान म उड़े खातिर ओला घेरी -भेरी गिरके उठे बर परथे।।

धर्मेन्द्र निर्मल
ग्राम पोस्ट कुरूद भिलाईनगर दुर्ग छ.ग.
9406096346

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