स्वच्छता हमर पहिचान

स्वच्छता के लहर चलत हे, स्वच्छता के शोर।
साफ हो जाहि घर-अंगना, अउ साफ हो जाहि खोर।।
साफ करबो गांव शहर ला, संग मा देश अउ राज।
मिलजुल के सब मेहनत करबो, बनहि नवा समाज।।
स्वच्छता सब जग बगराबो, धरबो नवा धियान।
स्वच्छता हमर पहिचान। स्वच्छता हमर पहिचान।।

गंदगी के बाढ़य ले, हो जाहि बिनास।
स्वच्छता के आदत बनहि होही हमर विकास।।
राग द्वेष दुरिहा भगाबो, अउ गलती ला माफ।
बैर दुश्मनी घलो भगाबो, अंतस होही साफ।।
साफ हो जाहि तन मन ह, अउ आही नवा बिहान।
फेर गरब होही केहे म, स्वच्छता हमर पहिचान।।

अमित कुमार
गाड़ाघाट-पाण्डुका, गरियाबंद

संघरा-मिंझरा

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