सरगुजिहा गीत

हाथे धरे बीड़ा, लगावत हो रोपा
मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी
मिले आबे……………

बेर उगते ही डसना उड़ासेन
माया मिलाए के केलवा बनाएन
खाएक आबे संगी तै सुन ले फरी फरी.
मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी।

तै हस संगी मोर हिरदे कर चैना,
तै हस मोर सुगा मै हो तोर मैना,
तोर सूरता संगी मोला आएल घरी घरी
मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी।

मधु गुप्ता ‘महक’

संघरा-मिंझरा

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