कमरछठ कहानी – सातो बहिनी के दिन

-वीरेन्द्र ‘सरल‘
एक गांव में सात भाई अउ एक बहिनी के कुम्हार परिवार रहय। सबो भाई के दुलौरिन बहिनी के नाम रहय सातो। एक समे के बात आय जब आशाढ़ के महिना ह लगिस। पानी बरसात के दिन षुरू होईस तब कुम्हार भाई मन पोरा के चुकी-जांता, नंदिया बइला अउ गणेष भगवान के मूरती बनाय बर माटी डोहारबो कहिके गाड़ी में बइला ला फांदिन अउ गांव के बाहिर खार डहर चले लगिन। उही बेरा में नानकिन बहिनी सातो घला माटी डोहारे बर जाहूँ कहिके जिद करे लगिन। मयारूक भाई-भौजाई मन, तैहा झन जा नोनी बड़े बाढ़बे तब जाबे कहिके ओला अड़बड़ छेकिन फेर सातो ह मानबे नइ करिस। हार खाके भौजाई मन नानकुन टुकना ला ओखर मन मढ़ाय बर ओखर मुड़ में बोहा दिन अउ अपन संग में लेगे लगिन। सातो बने एक मन के आगर अपन नान-नान पांव में बड़े भौजी के अछरा ला धरके ठुबुक-ठुबुक रेंगे लगिस।
गाँव के बाहिर खार में एक ठन तरिया रहय उही तीर के करिया माटी ला कुम्हार भाई मन मूरती बनाय बर डोहारे। सबो झन उहाँ पहुँच के माटी खने लगिन। सातो घला अपन ननची कुदारी में माटी के खने लगिस। नानकुन लइका काय जाने बपरी ह, भोरहा में उहीं मेरन के भुड़ू ला खन पारिस। ओ भुड़ू म नाग-नागिन के बसेरा रहय। अभी उहां नाग-नागिन मन तो नइ रिहिन, चारा चरे बर गे रिहन फेर सातो के कुदारी के मार में ओखर जम्मो पिला मन मरगे। माटी ला गाड़ी बइला अउ टुकना चरिहा में भरके कुम्हार परिवार अपन घर लहुटगे।
येती जब नाग-नागिन मन चारा चरके अपन भुड़ू में लहुटिन तब अपन घर के दषा अउ अपन पिला मन ला मरे देख के उखर आत्मा कलपकगे। ओमन श्राप दे दिन कि जा रे बैरी हो जउन ह मोर पिला मन ला मारे हे तइसने ओखरो पिला ह मर जाय।
अइसने अइसने गजब दिन बीतगे। सातो बने मोटियारी होगे। बने असन सगा देख के सातो के भाई मन बने धूमधाम से ओखर बिहाव कर दिन। सातो ह अपन मइके ले बिदा होके ससुरार आगे। साल भर बीतिस तहन बने अम्मल मे रहिगे। नव ले दस पुरिस तहन बने सुघ्घर असन बेटा ला जनम दिस फेर थोडिक दिन में ही ओखर बेटा ह मरगे। अइसने-अइसने कई बेर ले सातो के लइका मन जनम धरे अउ मर जाय। सातो के जिनगी पहाड़ कस होगे।
सातो के घर गोसान ह एक झन पहुँचे हुए जोगी बबा तीर अपन दुख ला बताइस तब ओहा विचार करके नाग-नागिन के श्राप ला जान डारिस। ओहा एखर कटाव करे बर किहिस- तोर लइका मन सांप के डसे से मर जथे। ये साल के कमरछठ उपवास बर सातो ला कहिबे कि ओहा कमरछठ उपवास के बाद जब घर आही तब कमरछठ भगवान के परसाद लई ला कोन्हो भुडू ले बगरावत अपन घर तक लानही। भुडू तीर जाके नाग-नागिन के पूजा-पाठ करके अपन ननपन के गलती बर क्षिमा मांगही। तब तोर घर में कोन्हो परकार के अल्हन नइ आय अए तोर लोग-लइका मन ऊपर कोन्हो विपत नइ आय।
घर गोसान ह घर पहुँच के सबो बात ला सातो ला बताइस तब ओला अपन ननपन के बात ह सुरता अइस। ओहा कमरछठ के दिन जोगी बबा के बताय मुताबिक कमरछठ भगवान के उपवास रिहिस अउ भिंभोरा तीर जाके नाग-नागिन के पूजा करिस अउ अपन अनजाने गलती बर क्षिमा माँगिस। अवइया साल तक सातो के कोरा फेर हरियाइस अउ कोन्हो परकार के अल्हन नइ आइस। अब ओखर सबो लइका मन जियत-जागत सुख के दिन बिताये लगिन। जइसे सातो के दिन बहुरिस तइसने सबो के दिन बहुरय। बोलो कमरछठ भगवान की जय।



संघरा-मिंझरा

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