पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : शुकलाल प्रसाद पांडेय

हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार मन के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन –

छत्तीसगढ़ी सूक्तियाँ

जेहर पर के प्रान बचाथे।
तेकर ले इसवर सुख पाथे।।

बुद्धमंता मन सिरतो कहथें।
बनिजेच मां लछिमी जी बसथें।।

मनखे मनखे होथे अंतर।
कोनो हीरा कोनो कंकर।।

दुनोंदीन ले बिनसिन पांड़े।
हलुआ मिलिस, मिलिस नइ मांड़े।।

दू कौंरा जाथे जब भीतर।
तभे सूझथे देंवता-पीतर।।

मनखे ला विपदा जब आथै।
तब अपनों दूसर हो जाथै।।

शुकलाल प्रसाद पांडेय

सरला शर्मा: द्विवेदी युग के स्वाधीन चेता कवि पण्डित शुक लाल पाण्डे जी ल प्रणाम , सुरता करव …

“पढ़े लिखे सब फायदा ला मास्टर गोठियाथस तैंहर,
कथा पुरान भागवत साही सब ला गन लेथव मैं हर।
तोर गियान इहां नई ठहरे निमरा ल निमार लेथव,
कहां कहां गनियारी घुटकु टपकू एक ठन कहि देथंव
हम नई होवन पण्डित सन्डित,तहिं पढ़े कर आग लुआठ,
ये किताब अउ गजट सजत ल जीभ लमा के थीं चाट
जनम के हम तो नांगर जोता, हम नई जानन सोला सतरा,
भूरवा भैंसा ताता ताता, इही हमर पोथी पतरा ।”
शुकलाल प्रसाद पांडेय

अरूण कुमार निगम: पंडित शुकलाल पांडेय जी ला पितर पाख मा सुरता करके नवा पीढ़ी ला अँजोर दे बर बधाई

शुकलाल प्रसाद पांडेय

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