सोनाखान के शान: वीर नारायण महान

छत्तीसगढ राज हा अपन पोठ खनिज संपत्ती के कारन देश-बिदेश मा परसिद्ध हावय। इहां चारो खुँट जंगल के हरियाली अउ अन-धन के अगाध खुशहाली बगरे हावय। धान-पान अउ ओनहारी बर हमर राज मा भन्डार आगर भरे रथे। एखरे सेती धान के कटोरा हमर छत्तीसगढ राज हा कहाथे। धरम-करम अउ दान-पुन मा घलाव हमार ए राज हा अघुवा हावय। मंदिर-देवाला,मेला-मङई,तीरथ-बरथ के कोनो कमी नइ हे। परकीती हा घलो हमर राज ला अंतस ले मया लुटाय हावय तभे तो इहां नंदिया-नरवा,कछार-भाँठा,मइदान,घाटी अउ खेत-खलिहान के भरमार हे। सबले बङे बात हमर ए नेवरिया राज हा बिकास के रद्दा मा सरलग दउङत हावय। नवा राज बने सोला बच्छर होगे हे फेर बिकास के रद्दा मा रेंगई हा अजादी बिन बङ मुसकुल रहीस। हमर देश ला अजाद होय सत्तर बच्छर होगे हे अउ बिकास के रथ मा सवार होके समे के संगे संग सुग्घर भागत हावय। फेर ए अजादी के बरदान हा तन-मन अउ धन के लाखों बलिदान ले मिले हावय। अइसने सोज्झे फोटईहा कोनो रद्दा मा परे नइ मिले हे हमर ए अजादी हा। देश के संगे संग हमर छत्तीसगढ परदेश मा ए अजादी मा सरबस निछावर करईया *दधीचि* मन के कोनो कमी नइ हे। अजादी के अमर शहीद बलिदानी मा हमर राज के नांव के अलख जगईया मा सबले अघुवा अमर वीर नारायण सिंह के नांव हा अव्वल हावय।




छत्तीसगढ के गरब अउ गुमान वीर नारायण सिंह हा आदिवासी जमींदार परवार के सपूत रहीन। ए मन हा अपन बङहर ददा के जमीन-जयदाद मा बङ अराम ले एश-अराम के जिनगी ला बिता सकत रहीन। वीर नारायण हा अराम ले जादा परहित मा, देशहित मा अजादी ला अपन मन मा रमा लीन। अपन जनमभूमि अउ जनता के रक्छा बर ए मन हा अपन परान हाँसत-हाँसत निछावर कर दीन। इंखर इही करनी हा इनला अमर बना दीस। छत्तीसगढ के असल अउ सरल निवासी आदिवासी बंस मा जनम लेवईया नारायण सिंह हा बिंझवार समाज के बीर बेटा रहीन। इंखर जनम हा महानदी के घाटी अउ छत्तीसगढ के माटी सोनाखान मा बछर 1795 मा होय रहीस। इंखर ददा रामसाय हा सोनाखान के जमींदार रहीन। बछर 1818-19 के बखत मा अंग्रेज अउ भोंसले राजा मन हा बङ अतियाचार करत रहीन। इही अतियाचार के बिरोध मा जमींदार रामसाय हा तलवार उठाय रहीन फेर ए बिदरोह ला केप्टन मैक्सन हा दबा दे रहीन। बिदरोह के बाद मा रामसाय हा अपन बिंझवार आदिवासी समाज के समरथन लउ सहजोग ले अपन दल-बल ला सकेल के पोठ करीन। इंखर बाढत दल-बल ला देख के अंग्रेज मन हा जमींदार रामसाय ले राजीनामा कर लीन। देशभक्ति अउ बहादुरी नारायण सिंह ला अपन बाप ले बपउती मा मिले रहीस। ददा के मिरित्यु पाछू ए मन हा बछर 1830 मा सोनाखान के जमींदार बन गीन।




नारायण सिंह हा अपन आदत बेवहार ले जन-जन के हितवा,नियाव धरमी, बहादुर जमींदार के रुप मा लोकप्रिय बन गीन। लोगन मन के अंतस मा नारायण सिंह परजा पालक,अनियाव ले लङईया अउ जनता के पोसईया के रुप मा जघा बनाईन। ए मन हा जन-जन के अघुवा अउ हितवा जमींदार बन के अपन अंचल मा लोकप्रिय अउ जनप्रिय होगें। इंखर इही परसिद्धी हा परोसी जमींदार मन ला फुटहा आँखी मा घलाव नइ सुहावत रहीस। तीर तखार के इंखर संगी जमींदार मन हा इंखर ले बैर अउ जलन भाव रखंय। बछर 1854 मा अंग्रेज मन हा कर वसूली बर एक ठन नवा कर *टकोली* ला लागू कर दीन। ए*टकोली* कर के नारायण सिंह हा जनता के हित मा बङभारी बिरोध करीन। एखरे सेती रइपुर मा वो समे के डिप्टी कमिशनर इलियट हा इंखर सबले बङे बिरोधी अउ बैरी बनगे। बछर 1856 मा सरी छत्तीसगढ मा पानी नइ गिरीस ता सुख्खा के संग अकाल परगे। लोगन भूखन-लाँघन मरे ला धर लीन। खाये-पीये के अब्बङ समसिया समागे। नारायण सिंह हा बिपदा के ए घङी मा अपन परजा के संग खाँध मा खाँध डारके खङे होगीन। अपन अंचल ले भुखमरी ला मिटाय बर ए मन हा सरी उदिम करीन। अपन मालगुजारी के सरी माल अउ अनाज ला जनता के दुख-पीरा ला मेटाय बर बाँट दीन। अपने जइसन भुखमरी मेटाय के उदिम करे के बिनती परोसी जमींदार मन ले करीन फेर कोनो मानीन ता कोनो नइच मानीन। जनता के भुखन-लाँगन रहई हा एमन ला घातेच जियानीस। इही दरद-पीरा ला ले के नारायण सिंह हा अपन परोसी जमीदार कसडोल के बैपारी माखन ले मदद के गोहार लगाईन। एमन बिनती करीन के अपन गुदाम मा भरे अनाज ला इहां के गरीब मन ला बाँट दंय। ए बात ला बैपारी हा नइ मानीच। एखरे सेती नारायण सिंह हा वो बैपारी के गोदाम के तारा ला टोरवा के उहां भरे सरी अनाज ला गरीब जनता मा बटवा दीन। वो बैपारी हा ए बात के सिकायत अंग्रेज अधिकारी ले कर दीस। अंग्रेज सरकार हा नारायण सिंह ला 24 अक्टूबर 1856 मा संबलपुर ले पकङ के रइपुर के जेल मा बन्द कर दीस। इही समे मा देशभर मा अजादी के लङई मात गे ता वो अंचल के लोगन मन हा जेल मा बन्द नारायण सिंह ला अपन अघुवा मान लीन अउ अजादी के लङई मा सामिल होगें। नारायण सिंह हा घलाव अंग्रेज के बाढत अतियाचार ले लङे बर अजादी के लङई मा कूद दीन अउ जेल ले भाग गीन।




अंग्रेज मन संग लङई लङीन अउ अपन आप ला अंग्रेज ला संउप दीन। अगस्त 1857 मा देशभक्त सैनिक अउ अपन सहजोगी के मदद ले वीर नारायण सिंह एक बेर फेर जेल ले निकल भागीन अउ ए दरी अपन गांव सोनाखान जा पहुँचीन। अपन गाँव मा पाँच सौ बंदुक वाले मन के सेना बनाइन। अंग्रेथ घलाव कलेचुप नइ बईठीन। ए हू मन हा अपन दल-बल के संघरा सोनाखान बर निकल गीन। अंग्रेज मन ला सोनाखान के बारा मा कुछु जादा जानकारी नइ रहीस फेर लालची अउ गद्दार जमींदार मन के मदद ले सोनाखान आ पहुँचीन। सोनाखान के जंगल मा वीर नारायण सिंह के सेना अउ अंग्रेज मन के भारी लङई मात गे। अंग्रेज मन हा हारे ला धर लीन। एखर ले अंग्रेज मन खखुवागें अउ जनता उपर अतियाचार ला बढा दीन। वीर नारायण सिंह हा अपन जनता ला अंग्रेज के अतियाचार ले बचाये खातिर अपन आप ला सोनाखान ले निकाल के लकठा के एक ठन पहाङी मा जाके सरन ले लीन। अंग्रेज मन हा सोनाखान मा खुसर के सरी गांव भर मा आगी लगा दीन। नारायण सिंह मा जब तक सक्ती अउ समरथ रहीस अपन छापामार बिधि ले अंग्रेज मन ले लङत अउ पदोवत रहीन। बङ दिन ले ए लुकाय-चोराय लङई बिधि ले लङई चलते रहीस फेर तीर तखार के जमींदार मन हा गद्दारी करके नारायण सिंह ला पकङवा दीन। वीर नारायण सिंह उपर राजद्रोह के मुकदमा चलाय गीस। एक परजा पालक,जन-जन के हितवा उपर राजद्रोह के मुकदमा हा सरासर गलत अउ लबारी रहीस फेर अंग्रेज मन के नियाव के नाटक अइसनहे होवय। अपन मनमरजी नियाव के नाऔव मा अनियाव करंय।
अंग्रेज मन हा राजद्रोह के नांव मा वीर नारायण सिंह ला मिरित्युदंड के रुप मा फाँसी के सजा सुना दीन। 10 दिसम्बर 1857 के दिन रइपुर के जयस्तंभ चउक मा वीर नारायण सिंह ला फाँसी मा टाँग दे गीन। फाँसी मा झुलत इंखर देंह ला तोप ले उङा दीन। ए हमर भाग हे के अइसन वीर सपूत हा हमर छत्तीसगढ महतारी के कोरा बलौदाबाजार मा जनम धरे रहीन।




भारत देश अउ छत्तीसगढ राज घलाव अमर शहीद बलिदानी वीर नारायण के करजा लागत हे। इही करजा ला चुकाय खातिर भारत सरकार हा बछर 1987 मा 60 पइसा के डाक टिकिट छापे रहीन। ए डाक टिकिट मा वीर नारायण सिंह ला तोप के आगू मा बंधाय देखाय गे हे। छत्तीसगढ हा घलाव अपन राज के अकलउता अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के नांव ला वीर नारायण सिंह के नांव मा राख के सनमान दे हावय। एखरे संगे संग छत्तीसगढ सरकार हा खाद्य सुरक्छा अधिनियम ला सबले पहिली अपन राज मा लागू करीन हे। ए अधिनियम ले सस्ता अनाज गारंटी जन-जन ला मिलथे। ए योजना ला देश भर मा सबले पहिली हमर राज मा लागू करे के पाछू वीर नारायण सिंह के सबला अनाज मिलय, कोनो भूख झन मरय ए सोच अउ समझ हा हावय।
अइसन जन-जन के अघुवा अमर बलिदानी अजादी के मयारू वीर नारायण सिंह ला ए छत्तीसगढ राज हा 10 दिसम्बर के दिन हर बछर अपन सरदधाजंली अरपित करे जाथे। छत्तीसगढ के आन बान शान सोनाखान के माटी अउ उंखर सपूत वीर नारायण सिंह ला जींयत भर सत-सत पयलगी।

कन्हैया साहू “अमित”
शिक्षक~भाटापारा (छ.ग)
संपर्क ~ 9753322055



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