पानी हे अनमोल

भईया, बड़ कीमत के बोल। पानी हे अनमोल॥ पानी ले हे ये जीवन। नदिया, सागर, परबत, बन॥ पानी ले जिनगी हरियर हे। खुसियाली घर-घर हे॥ कवन बताही येकर मोल। पानी हे अनमोल॥ जीव जगत सबके अधार। पानी ले ये सब संसार॥ हंसी गोठ सब के सार। येकर महिमा अपरम्पार॥ बचावव बूंद-बूंद तौल। पानी हे अनमोल॥ कटगे जंगल, कमती होगे बरसा। […]

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फागुन के दोहा

कहूं नगाड़ा थाप हे, कहूं फाग संग ताल। मेंहदी रचे हाथ म, अबीर, रंग, गुलाल॥अमरईया कोइली कुहकय, मऊहा टपके बन।पिंयर सरसों गंध होय मतौना मन॥पिचकारी धर के दऊड़य, रंग डारय बिरिजराज।उड़य रंग बौछार, सब भूलिन सरम अऊ लाज॥मोर पिया परदेस बसे, बीच म नदिया, पहाड़।मिलन के कोनो आस नहीं, बन, सागर, जंगल, झाड़॥जमो रंग कांचा जग म, परेम के रंग […]

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