स्वच्छता हमर पहिचान

स्वच्छता के लहर चलत हे, स्वच्छता के शोर। साफ हो जाहि घर-अंगना, अउ साफ हो जाहि खोर।। साफ करबो गांव शहर ला, संग मा देश अउ राज। मिलजुल के सब मेहनत करबो, बनहि नवा समाज।। स्वच्छता सब जग बगराबो, धरबो नवा धियान। स्वच्छता हमर पहिचान। स्वच्छता हमर पहिचान।। गंदगी के बाढ़य ले, हो जाहि बिनास। स्वच्छता के आदत बनहि होही हमर विकास।। राग द्वेष दुरिहा भगाबो, अउ गलती ला माफ। बैर दुश्मनी घलो भगाबो, अंतस होही साफ।। साफ हो जाहि तन मन ह, अउ आही नवा बिहान। फेर गरब होही…

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करसी के ठण्डा पानी

गरमी के मउसम अउ सुरूज नरायन अंगरा बरोबर तिपत हे। गरमी बरसात अउ ठण्डा के मउसम एक के पाछु एक आथे एहा जुग जुग ले चलत हे। फेर आजकल के मउसम बदले के समय हा घलो परिवरतन हो गे हे। आधुनिकता, उदयोग अउ बाढ़त परदूसन ले मउसम म घलो बदलाव होवत जावत हे। ऐ बदलाव के करइया हम मनखे मन आन। हमर राज म घलो तीनों ठन मउसम के अब्बड़ महत्व हे। बरसात फेर ठण्डा अउ ठण्डा के पाछु गरमी के मउसम आथे। ठण्डा तक तो नदी नरवा अउ कुवां…

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