करसी के ठण्डा पानी

गरमी के मउसम अउ सुरूज नरायन अंगरा बरोबर तिपत हे। गरमी बरसात अउ ठण्डा के मउसम एक के पाछु एक आथे एहा जुग जुग ले चलत हे। फेर आजकल के मउसम बदले के समय हा घलो परिवरतन हो गे हे। आधुनिकता, उदयोग अउ बाढ़त परदूसन ले मउसम म घलो बदलाव होवत जावत हे। ऐ बदलाव के करइया हम मनखे मन आन। हमर राज म घलो तीनों ठन मउसम के अब्बड़ महत्व हे। बरसात फेर ठण्डा अउ ठण्डा के पाछु गरमी के मउसम आथे। ठण्डा तक तो नदी नरवा अउ कुवां…

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पावन धरती राजिम ला जोहार

पैरी सोढ़ू के धार, महानदी के फुहार पावन धरती राजिम ला बारंबार जोहार माघी पुन्नी के मेला भरागे किसम किसम के मनखे सकलागे दुख पीरा सबके बिसरागे अउ आगे जीवन मा उजियार पावन धरती राजिम ला बारंबार जोहार। तीन नदी के संगम हे जिहां बिराजे कुलेश्वर नाथ हमर राज के हे परयाग जागत राहय राजीवलोचन नाम धन धन भाग छत्तीसगढ़ के बाढ़त राहय एखर परताप पावन धरती राजिम ला बारंबार जोहार। पुन्नी पुनवास के मउसम आगे हमर परयाग मा मेला भरागे नवा सुरूज के दरसन पाके जाड़ शीत हा घलो…

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