मन के दीया ल बार

कटय नहीं अंधियार चाहे लाख दीया ल बार होही जगजग ले अंजोर मन के एक दीया ल बार। जाति-धरम भाषा के झगरा बंद होक जाही मया पिरीत के रूंधना चौबंद हो जाही सावन कीरा कस गंजा जाही संसार… सुने म न तो कान पिरावय न देखे म आंखी देख सुन के कर नियाव, निकले मुख अमरित बानी कबीर कहे हे […]

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मन के दीया ल बार

कटय नहीं अंधियारचाहे लाख दीया ल बारहोही जगजग ले अंजोरमन के एक दीया ल बार।जाति-धरम भाषा के झगरा बंद होक जाहीमया पिरीत के रूंधना चौबंद हो जाहीसावन कीरा कस गंजा जाही संसार…सुने म न तो कान पिरावय न देखे म आंखीदेख सुन के कर नियाव, निकले मुख अमरित बानीकबीर कहे हे उड़ जय थोथा राहय सुपा में सार…तैंतीस कोटी देवी-देवता […]

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