रंग डोरी होली

रंग डोरी-डार ले गोरी, मया पिरीत के संग म, आगे हे फागुन मोर नवा-नवा रंग म। झूमे हे कान्हा-राधा के संग म, मोर संग झुम ले तै, रंग के उमंग म। रंग ले भरे गोरी, तोर लाल-लाल गाल हे, होरी म माते, तोर रंग के कमाल हे। फ़ाग गए फगुनिया, जियरा बेहाल हे, रात भर बाजे नंगाडा, सुर अउ ताल हे। रंग म तै मात ले गोरी, रंग के तिहार हे, हरियर अउ लाल, तोर म दिखथे बवाल हे। रंग के तिहार, होली रंग के तिहार हे, नवा-नवा रंग म,…

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सिक्छा ऊपर भारी पड़े हे अंधबिस्वास

विकसित होत गांव-सहर म जतना तेजी ले सिक्छा ह आघु नई बढहे हे, तेखर ले जादा तेजी ले अंधबिस्वास के विकास होईस हे। सबले जादा हमर भारत देस म अंधबिस्वास के मानने वाला मनखे मन हवय। ओहु म अंधबिस्वास ल माने म अनपढ़ मनखे मन ले जादा पढ़े-लिखे मनखे मन मानथे। अउ बाबा-बइगा मनके झांसा म आके अपन बिसवास ल गवां डारथे। जुन्ना बेरा म जब मनखे मन मेर कुछु साधन बनेले नइ रहिस हे तब ग्यानी बाबा बइगा मनके तीर जाके ग्यान के बात सीखे ल मिलये, लेकिन अभी…

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