धानी भुईया मोर छत्तीसगढ़

बड़ सुग्घर महतारी के कोरा धान कटोरा धानी रे। डोंगरगढ़ बमलई ईहा तेलिन दाई के घानी रे।। पैरी सोंढुर के धार संग महानदी के पानी हे। जनमेन इही भुइया म धन धन हमरो जिनगानी हे।। जुड़ पुरवाही झकोरा म लह लहावत धान के बाली। हरियर लुगरा पहिरय दाई माथ नवावय सूरज के लाली।। अइसन हे छतीसगढ़ के भुईया जिनगी हमर भागमानी हे। जनमेन इही भुइया म धन धन हमरो जिनगानी हे।। सरग बरोबर गांव गली हे अमरईया खार ओनहारी डोली। लइका खेलय भवरा बाटी बीरो बिल्लस हासी ठिठोली।। कहानी कथा…

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सत अउ अहिंसा के पुजारी गुरु घासीदास

गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ राज मा संत परम्परा के एक परमुख संत आय। सादा जीवन उच्च विचार के धनवान संत गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ राज ला नवा दिसा दिस अउ दसा ला सुधारे बर सरलग बुता करिन अउ अपन सरबस लुटादिन। जीवनी:- बछर 1672 मा हरियाणा राज के नारनौल गाँव मा बीरभान अउ जोगीदास नाव के दु झिन भाई जिनगी चलावत रिहिस। दुनो भाई सतनामी साध मत के साधक रिहिस अउ अपन मत के परचार परसार करत रिहिस।दुनो भाई अब्बड़ स्वाभिमानी रिहिस। सतनामी साध मत के विचारधारा के अनुसार कोनो भी मनखे…

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