पीपर तरी फुगड़ी फू

समारू बबा ल लोकवा मारे तीन बछर होगे रिहिस, तीन बछर बाद जब समारू बबा ल हस्पताल ले गांव लानीस त बस्ती भीतर चउक में ठाड़े पीपर रुख के ठुड़गा ल कटवत देख के, सत्तर बछर के समारू के आँखी कोती ले आँसू ढरक गे। बबा के आँखी में आँसू देख के पूछेंव कइसे बबा का बात आय जी, त बबा ह भरे टोंटा ले बताइस, कथे सुन रे धरमेंद तैं जेन ये पीपर रूख ल देखत हस जेन ल सुखाय के बाद काटत हवे तेन ल हमर बबा के…

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सेल्फी ले ले

नवा चलागन चले है संगी, जेकर चरित्तर काला बतांव, कोनो बेरा अउ कोनो जघा मैं सेल्फी ले बर नइ भुलांव। छानी में बइठे करीया कउवा के संग में, कचरा फेके के झऊहा के संग में, दारू भट्ठी में पउवा के संग में, चाहे कोनो पकड़ के भले ठठाय, फेर सेल्फी लेय बर नइ भुलाय। चाहे घुमत राहंव मेहा जंगल झाड़ी, चाहे गे राहंव मेहा आंगन बाड़ी, चाहे चलत राहय रेलगाड़ी, मैं पटरी में कट के भले मर जांव, फेर सेल्फी लेय बर नइ भुलांव। तुरते जन्मे टूरा के संग में,…

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