रूख तरी आवव

रूख तरी आवव, झुलवा झुलव,थोरकुन बइठव, सुसता लेवव, रूख तरी आवव…… घाम गम घरी आगे रुख तरी छइया पावव, जिनगी के आधार रूख तरी आसरा पावव. रूख तरी आवव…… चिरिया-चिरगुन,पंछी-परेवा बर रूख सुघ्घर ठीहा हवय, चलत पुरवइया पवन ले ,जम्मो तन मन ल जुड़ावव. रूख तरी आवव……. चारो अंग कटगे जंगल झारी नागिन रददा रेंगत हवय, बगरगे मकान बहुमंजिला,बड़का कारखाना उठत, धुंगिया ले बचावव. रूख तरी आवव……. झन काटव रूख राई ल ,ग्लोबल वार्मिंग होवत हवय, परियावरन ल जुरमिर, धरती ल नास ले बचावव. रूख तरी आवव………. सीख ले मनखे…

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झिरिया के पानी

मयं झिरिया के पानी अवं, भुंइया तरी ले पझरत हवव,  मयं झिरिया के पानी अवं, मयं झिरिया के पानी……. अभे घाम घरी आगे, नदिया नरवा तरिया अटागे, नल कूप अउ कुआं सुखागे, खेत खार, जंगल झारी कुम्हलागे, तपत भुईया के छाती नदागे. पाताल भुंइया ले पझरत हवं,मयं झिरिया के पानी अवं, मयं झिरिया के पानी ………… गांव गवई, भीतरी राज के, परान ल बचाय के मोर उदिम हे, करसा ,हवला ,बांगा धरे, आवत जम्मो मोर तीर हे, अमरित हवय मोर पानी रे, कभू नइ सुखावव,मयं झिरिया के पानी अवं, मयं…

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