भुलवारे बर तब अंजोर के गजब गीत गाथे : डॉ. परदेशीराम वर्मा के गीत

कलेचुप बइगा हा जब अंधियारी घपटाथे, भुलवारे बर तब अंजोर के गजब गीत गाथे। बडे गौटिया कहिथंन जेला पांव परइया मन, उही गुनी मनखे के दिखथे बइहा कस लच्छन मनखे मनखे ले जादा वोला बिखहर हा भाथे। भुइयां, भाखा, दाई के जस गाथे नवां नवां, भीतर-भीतर गजब खोड़ पिरीत उपर छांवा। बड़ा गियानी हे मुस्किल म अच्छर उमचाथे। पनही चमकाके

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दूसरइया बिहाव

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन दू बछर पहिली रिहिस हे। वो अइसे लागथे जाना-माना अपने गुस्सेलहा बानी म लाल आंखी मोला देखावत हे। वोकर ये हालत ला देख के मोर करेजा कांप जथे अउ मोला अपन वो बचन के सुरता आ

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