सरग हे जेकर एड़ी के धोवन

सरग ह जेखर एड़ी के धोवन, जग-जाहरा जेखर सोर। अइसन धरती हवय मोर, अइसन भुईयां हवय मोर॥ कौसिल्या जिहां के बेटी, कौसल छत्तीसगढ़ कहाइस, सऊंहे राम आके इहां, सबरी के जूठा बोइर खाइस। मोरध्वज दानी ह अपन, बेटा के गर म आरा चलाइस, बाल्मिकी के आसरम म, लवकुस मन ह शिक्षा पाइन। चारों मुड़ा बगरे हे जिहां, सुख-सुम्मत के अंजोर। […]

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तैं ठउंका ठगे असाढ

तोर मन का हे तहीं जान? तैं ठउंका ठगे असाढ। चिखला के जघा धुर्रा उड़े, तपे जेठउरी कस ठाड़॥ बादर तोर हे बड़ लबरा ओसवाय बदरा च बदरा कब ले ये नेता लहुटगे? जीव जंतु के भाग फूटगे॥ किसान ल धरलिस अब तो, एक कथरी के जाड़॥ तोर मन का हे तहीं जान? तैं ठउंका ठगे असाढ़॥ धरती के तन […]

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