तैं ठउंका ठगे असाढ

तोर मन का हे तहीं जान? तैं ठउंका ठगे असाढ। चिखला के जघा धुर्रा उड़े, तपे जेठउरी कस ठाड़॥ बादर तोर हे बड़ लबरा ओसवाय बदरा च बदरा कब ले ये नेता लहुटगे? जीव जंतु के भाग फूटगे॥ किसान ल धरलिस अब तो, एक कथरी के जाड़॥ तोर मन का हे तहीं जान? तैं ठउंका ठगे असाढ़॥ धरती के तन […]

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युग प्रवर्तक हीरालाल काव्योपाध्याय

छत्तीसगढ़ी भासा के पुन-परताप ल उजागर करे बर धनी धरमदास जी, लोचनप्रसाद पाण्डे, सुन्दरलाल शर्मा जइसे अऊ कतकोन कलमकार अऊ साहित्यकार मन के योगदान हे। अइसने रिहिन हमर पुरखा साहित्यकार हीरालाल काव्योपाध्याय। जऊन मन ह सबले ले पहिली छत्तीसगढ़ी भासा के व्याकरन लिख के छत्तीसगढ़ी भासा ल पोठ करिन। छत्तीसगढ़ी भासा के व्याकरन सन् 1885 च म सिरजगे रिहिस। जेखर […]

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