पइधे गाय कछारे जाय

पइधे गाय कछारे जाय भेजेन करके, गजब भरोसा। पतरी परही, तीन परोसा। खरतरिहा जब कुरसी पाइन, जनता ल ठेंगवा चंटवाइन। हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय, कछारे जाय ॥ ऊप्पर ले, बड़ दिखथे सिधवा, अंतस ले घघोले बघवा। निचट निझमहा, बेरा पाके, मुंहूं पोंछथें, चुकता खा के। तइहा ले टकरहा आय, पइधे गाय कछारे जाय ॥ गर म टेम्पा, घंटी […]

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कइसे उदुप ले डोकरा होगे

कइसे उदुप ले डोकरा होगे जंगल के बघवा तेंहा, कइसे चऊंर–चाबे बोकरा होगे। एक कोरी म छै बछर कम, कइसे उदुप ले, डोकरा होगे।। जौन आथे तौन, बखरी ला उजारथे। पेट ला हमर काट के, देखावटी सुलारथे। छत्तीसगढ़ ल चरागन भुंइया बना लीन, चोरहा मन चौरस्ता म कोतवाल ल ललकारथे। मिठलबरा मन के डिपरा पेट, हमर बीता भर खोदरा होगे। […]

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