बसंत बेलबेलहा

सर सरात हवा संग जुन्ना पाना झरथे । फोंकियाये रूख के फुनगी बाती कस बरथे । रात लजकुरहीन संग दिन बरपेलिहा । दिल्लगी करथे चुपचुप बसंत बेलबेलहा । आमा जम्मो मऊरगे बउराये मन बऊरगे । चुचवाय संगी संऊरगे ललचाये अबड़ दंऊड़गे । सृस्टि दुलहिन बिहाये बर बरतिया बनगे ठेलहा । दुलहा बनके आये हे बसंत बेलबेलहा । हरियर डारा म […]

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पुरखा मन के चिट्ठी

जय भारत , जय धरती माता सबले उप्पर म लिखे हवय । सब झन बर , गजब मया करे हे , लागत हे सऊंहत दिखत हवय । हली भली रहिहहु सब बेटा , हम पुरखा मन चहत हबन । करम धरम हे सरग नरक , बिन सवारथ के कहत हबन । धुंआ देख के करिया करिया , छाती हर गजब […]

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