परशुराम

प्रकृति संभव हे, असंभव नइ हो सके, ओ ह सनातन रूप म ले चलत आवत हे अपनेच बनाए नियम रीत ले। फेर रिसीमुनी मन ओही म देवता ल खोजथे। ऋतु के देवता वरूण, मेघ के बरखा के देवता इन्र्न, ओखद (औशधि के अश्विनीकुमार, अग्निदेव इनकर बर प्रकृति के हरेक सक्ति म देवता के वास हे, अउ खुस होके सोचथे कि […]

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मैं वसुधा अंव

सृष्टि के पहिली कुछु नइ रिहिस, ना तो अंतरिक्ष अउ ना अगास रिहिस, लुकाए रिहिस वो ह हिरण्यगर्भ गुफा म अनचिन्हार असन, जउन ल कौउनो नइ समझ सकिन अउ नइ कौउनो चिन्हे सकिन। वेद पुरान मन म सृष्टि के रच्इया ल ब्रम्‍हा कहे गे हे फेर इनकर सिरजन ल धरर्ईया वसुधा त महिंच अंव, महिंच वो वसुधा अंव, जेकर उपर […]

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