राजा के मुड़ी म सिंग

ऐ बात तब के आय.जब हमन छुट्टी बिताए बर गांव म जान, हमर कुंती दई अब्बड किस्सा कहनी कहे..संझा ढलत देरी नई की सब्बो लईकामन खटिया ल जोर के बइठ जाए, तहां ले कुतीं दइ के कहनी सुरु हो जाए…एक ठन राजा रहिस..हव कहत रहू त कहनी ल आगू कहहू.. नइ हूकारू भरहू त कहनी ल इहिच मेर खतम समझहू..त सब्बो झिन ह.. ह… हव..अइसे कहत रहन…त ओ राजा ल चम्पी मालिस के सौकिन रहे…आगू गुडी़ म एक झिन बदरू नांव के न उ सियान रहे..अब्बड तान दे ,देके चम्पी…

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कुकुर के महिमा

भईगे महुं ल कुछु, बोले बर नई मिलिस त सोचेंव, चल बाहिर म हवा खा आवं, बिहनचे उठेंव, बिन दतुन मुखारी घसे, किंदरे कस निकल गयेंव। रददा म काय देखत हंव!!! द दा रे आनि-बानि के टुकुर टुकुर देखत मनखे असन फबित ओन्हा पहिरे, कुकुर…, कोउनो कबरा, त कोउनो बिलवा त कोउनो भुरवा…. मने मन म कहेव.. कस ग भगवान मोला तै ह काबर मनखे जनम देहे ग, महु ल दईसनेहे कुकुर नई बना देतेस!!! आगू गें, त दू झिन संगी मन, कुकुर ल संकरी म बांधे गोठियावत रहें, त…

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