तीजा तिहार

रद्दा जोहत हे बहिनी मन, हमरो लेवइया आवत होही। मोटरा मा धरके ठेठरी खुरमी, तीजा के रोटी लावत होही।। भाई आही तीजा लेगे बर, पारा भर मा रोटी बाँटबोन। सब ला बताबो आरा पारा, हम तो अब तीजा जाबोन।। घुम-घुम के पारा परोस में, करू भात ला खाबोन। उपास रहिबो पति उमर बर, सुग्घर आसिस पाबोन।। फरहार करबो ठेठरी खुरमी, कतरा पकवान बनाके।। मया के गोठियाबोन गोठ, जम्मों बहिनी जुरियाके। रंग बिरंगी तीजा के लुगरा, भाई मन कर लेवाबोन। अइसन सुग्घर ढ़ंग ले संगी, तीजा तिहार ला मनाबोन।। गोकुल राम…

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हरेली तिहार आवत हे

हरियर-हरियर खेत खार, सुग्घर अब लहरावत हे। किसान के मन मा खुशी छागे, अब हरेली तिहार आवत हे।। खेत खार हा झुमत गावत, सुग्घर पुरवाही चलावत हे। छलकत हावे तरीया डबरी, नदिया नरवा कलकलावत हे।। रंग बिरंग के फूल फुलवारी, अब सुग्घर डुहूँरु सजावत हे। कोइली पँड़की सुवा परेवना, प्रेम संदेशा सुनावत हे।। नर-नारी अउ जम्मो किसान, किसानी के औजार ला धोवत हे। किसानी के काम पुरा होगे, अब चिला चघाय बर जोहत हे।। लइका मन भारी उत्साह, बाँस के गेड़ी बनवावत हे। चउँर के चिला सुग्घर खाबो, अब हरेली…

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