छत्तिसगढ़ के गंगा : हरि ठाकुर के गीत

दूध असन छलकत जावत हे, महानदी के धार। छत्तिसगढ़ के माटी ओखरे सेती करे सिंगार।। लहर लहर लहरावै खेती, डोलावै धान कोदो राहेर तिंबरा बटुरा, मां भरथे मुस्कान हरियर हरियर जम्मो कोती दिखथे सबो कछार। दूध असन छलकत जावत हे, महानदी के धार॥ छत्तिसगढ़ के गंगा मइया, सब जन के महतारी तोर अँचरा मां राजिऊ लोचन तीरथ अब्बड भारी तोर […]

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पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता : हरि ठाकुर

व्‍हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म श्री हरि ठाकुर के कविता प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन – दिया बाती के तिहार होगे घर उजियार गोरी, अँचरा के जोत ल जगाये रहिबे । दूध भरे भरे धान […]

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