गांधी के देश मा हिंसक होवत मनखे

मोहन दास करमचंद गांंधी जेला जम्मो देशवासी मन बापू अउ राष्ट्रपिता कहिथे। शांंति के पुजारी अउ महात्मा घलाव कहिथन।ये सब ला एखर सेती बतावत हावँव कि ये सर्वनाम हा अउ कोनों दूसर बर नइ कहे जाय।यहू सच आय कि “अहिंसा के पुजारी “अउ “गांंधी बबा” के नाम से गांंधी जी ला देश दुनिया मा जाने अउ पूजे जाथे।यहू सच आय कि गांधी मा भारत हे अउ भारत मा गांधी के सत्य अहिंसा । अहिंसा ला गांंधी जी बताइस कि मन, बचन अउ करम से कोनों जीव के हइता ,हिनमान नइ…

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गुने के गोठ : मोर पेड़ मोर पहिचान

वासु अउ धीरज ममा फूफू के भाई ऑंय। दूनो झन चार छ: महिना के छोटे बड़ेआय। दूनो तीसरी कक्छा मा पढ़थें। वासु शहर के अँगरेजी इस्कूल मा पढ़थे अउ धीरज गाँव के सरकारी स्कूल मा। धीरज के दाई ददा किसानी करथँय अउ वासु के दाई ददा नउकरिहा हावँय। गर्मी के छुट्टी माँ एसो वासु हा ममा गाँव गइस। आजी आजा खुश होगे। ममा मामी के घलाव मया दुलार पाय लगिस।फेर सबले बढ़िया ओला धीरज लगिस। लइका अपन खेलबर संगवारी खोजथे। ओला अपन जँहुरिया संगवारी मिलगे। दू दिन वासु के महतारी…

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