कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना

आगे बसंत आगे ना, मोर अंगना मां बसंत आगे ना पियर-पियर आमा मउरे, लाली-लाली परसा फूले मन मंदिर महकन लागे ना, आगे बसंत आगे ना। मुच-मुचावय फगुनवा, मुच-मुचावय फगुनवा मन न ल महर-महर महकावय फगुनवा फगुनवा के रंग बरसाय बर बसंत आगे ना। महुवा के रस मन ला मतावन लागे ना बैरी बसंत हिरदे मां मया के बान चलावन लागे […]

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