करिया बादर

करिया बादर ल आवत देख के, जरत भुइंया हर सिलियागे। गहिर करिया बादर ल लान के अकास मा छागे, मझनिया कुन कूप अंधियार होवे ले सुरूज हर लुकागे, मघना अस गरजत बादर हर सबो डहार छरियागे, बिरहनी आंखी मा पिय के चिंता फिकर समागे। करिया बादर… गर्रा संग बादर बरस के जरत भुइंया के परान जुड़ागे, सोंधी माटी के सुवास

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