ढेला अऊ पत्ता

छोटकू म पहिली कक्षा म भरती होयेन त छोटे गुरूजी बिजलाल वरमा हर ढेला अऊ पत्ता के कहिनी सुनाये रिहिस से तेकर सुरता आज ले हावे। ठेला अऊ पत्ता दू परोसी दूनों म अड़बड़ मया राहय बिपत के बेटा म तको एक दूसर के संग देवे म गूलाझांझटी नई करेय। एक दिन ढेला हर पत्ता ल कहिथे संगवारी असाढ क़े

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