अमित के कुण्डलिया ~ 26 जनवरी

001~ तिरंगा झंड़ा धजा तिरंगा देश के, फहर-फहर फहराय। तीन रंग के शान ले, बैरी घलो डराय। बैरी घलो डराय, रहय कतको अभिमानी। देबो अपन परान, निछावर हमर जवानी। गुनव अमित के गोठ, कभू झन आय अड़ंगा। जनगण मन रखवार, अमर हो धजा तिरंगा। 002~ भारत भुँइयाँ भारत हा हवय, सिरतों सरग समान। सुमता के उगथे सुरुज, होथे नवा बिहान। होथे नवा बिहान, फुलय सब भाखा बोली। किसिम किसिम के जात, दिखँय जी एक्के टोली। गुनव अमित के गोठ, कहाँ अइसन जुड़ छँइयाँ। सबले सुग्घर देश, सरग कस भारत भुँइयाँ।…

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सेहत के खजाना – शीतकाल

हमर भारत भुईयाँ के सरी धरती सरग जइसन हावय। इहां रिंगी चिंगी फुलवारी बरोबर रिती-रिवाज,आनी बानी के जात अउ धरम,बोली-भाखा के फूल फूले हावय। एखरे संगे संग रंग-रंग के रहन-सहन,खाना-पीना इहां सबो मा सुघराई हावय। हमर देश के परियावरन घलाव हा देश अउ समाज के हिसाब ले गजब फभथे। इही परियावरन के हिसाब ले देश अउ समाज हा घलो चलथे। इही परियावरन के संगे संग देश के अर्थबेवसथा हा घलाव चलथे-फिरथे। भारत मा परियावरन हा इहां के ऋतु अनुसार सजथे संवरथे। भारत मा एक बच्छर मा छै ऋतु होथे अउ…

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