कविता : तोर पाईंया लागत हंव बाबा

मनखे-मनखे ल एक करे बर दे हस सन्देश गुरु घासीदास बाबा ,सत के पुजारी मोरे बाबा तोरे चरन के धुर्रा ल मान्थ म लगावां जी डोंगरी – पहाड़ म कैसे काटे जीवन सत के रद्दा दिखाये मनखे मन ल साधा के धोती साधा हावय तोर पहचान जोड़ा जैत खाम हावे तोर मान गिरौदपुरी गांव होंगे अब धाम नर नारी तोर करत हे परनाम सत के दीया ल जलाए बाबा मोर ग्यानी – यग्यानी ल दिखये रद्दा गरीब -दुखी ल नियाय देवाये झूठ लबारी ल भगाए नारी के सम्मान म नारी…

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कविता: कुल्हड़ म चाय

जबले फैसन के जमाना के धुंध लगिस हे कसम से चाय के सुवारद ह बिगडिस हे अब डिजिटल होगे रे जमाना चिट्ठी के पढोईया नंदागे गांव ह घलो बिगड़ गे जेती देखबे ओती डिस्पोजल ह छागे कुनहुन गोरस के पियैया “साहिल” घलो दारू म भुलागे आम अमचूर बोरे बासी ह नंदागे तीज तिहार म अब फैसन ह आगे पड़ोसी ह घलो डीजे म मोहागे का कहिबे मन के बात ल अब अपन संगवारी ह घलो मीठ लबरा होगे जेती देखबे ओती मोबाईल ह छागे घर म खुसर फुसुर अउ खोल…

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