खिलखिलाती राग वासंती

खिलखिलाक़े लहके खिलखिलाक़े चहके खिलखिलाक़े महके खिलखिलाक़े बहके खिलखिलाती राग वासंती आगे खिलखिलाती सरसों महकती टेसू मदमस्त भँवरे सुरीली कोयली फागुन के महीना अंगना म पहुना बर पीपर म मैना बैठे हे गोरी के गाल हाथ म रंग गुलाल पनघट म पनिहारिन सज – संवर के बेलबेलावत हे पानी भरे के बहाना म सखी – संगवारी संग पिया के सुध म सोरियावत हे मने मन अपन जिनगी के पीरा ल बिसरावत हे खिलखिलाक़े राग वासंती आगे पिंजरा ले मैना आँखी ले काजर हाथ ले कंगन मुँह ले मीठ बोली गावत…

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बसंत आगे रे संगवारी

घाम म ह जनावत हे पुरवाही पवन सुरूर-सुरूर बहत हे अमराई ह सुघ्घर मह महावत हे बिहिनिहा के बेरा म चिराई-चुरगुन मन मुचमुचावत हे बर-पीपर घलो खिलखिलावत हे महुआ, अउ टेसू म गुमान आगे बसंत आगे रे संगवारी कोयली ह कुहकत हे संरसों ह घलो महकत हे सुरूर-सुरूर पवन पुरवाही भरत हे मोर अंगना म संगवारी बसंत आगे जेती देखव तेति हरिहर लागे खेत-खार के रुख-राई मन भरमाथे फागुन बन के आगे पहुना अंगना म हे उछल मंगल मड़वा सज के संगवारी के बसंत आगे अंगना म रंग-गुलाल खेबोन बसंत…

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