अपन भासा अपन परदेस के पहचान

संपादक ये आलेख के लेखक के ‘प्रदेश’ शब्‍द के जघा म ‘परदेस’ शब्‍द के प्रयोग म सहमत नई हे। अइसे हिन्‍दी के अपभ्रंश शब्‍द मन जउन पहिली ले प्रचलित नई ये ओ मन ल बिना कारन के बिगाड़ के लिखई अर्थ के अनर्थ करना हे। ‘परदेस’ से आन देश के भाव आथे.. आज हमर छत्तीसगढ़ ल राज बने अठारह बछर […]

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तुंहर मन म का हे

तुंहर मन म का हे अपन अंतस ल बोल दव मोर मन के गोठ ल सुन लव अभी तो मान लव जो हे बात हांस के कही दव जिनगी के मया म रस घोल दव अभी तो बदलाव कर दव महुँ हंव किनारा म मझधार ल पार करा दव मया के गोठ हांस के बता दव… लक्ष्मी नारायण लहरे ,साहिल, […]

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