बेटी के महिमा

बेटी होथे राज दुलारी, लक्ष्मी जइसे येला मान । यहू हरे घर के दीपक जी, बढ़हाथे गा घर के शान।। सबले पहिली बिहना उठथे, घर के करथे बूता काम । कभू नहीं आराम करे जी, नइ माँगे वो काँही दाम ।। काम धाम मा हाथ बँटाथे , दाई ला देवय वो साथ । सबके सेवा करधे बेटी, रहय नही गा रीता हाथ ।। करे शिकायत कभू नहीं वो , खावय सबझन मिलके बाँट । भात साग ला बढ़िया राँधय , खुश होके सब खावय चाँट ।। कम झन आँकव बेटी…

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सदगुरु

पारस जइसे होत हे , सदगुरु के सब ज्ञान । लोहा सोना बन जथे , देथे जेहा ध्यान ।। देथे शिक्षा एक सँग , सदगुरु बाँटय ज्ञान । कोनों कंचन होत हे , कोनों काँछ समान ।। सत मारग मा रेंग के , बाँटय सबला ज्ञान । गुरू कृपा ले हो जथे , मूरख हा विद्वान ।। छोड़व झन अब हाथ ला , रस्ता गुरु देखाय । दूर करय अँधियार ला , अंतस दिया जलाय ।। नाम गुरू के जाप कर , तैंहर बारंबार । मिलही रस्ता ज्ञान के ,…

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