होली आवत हे

आगे बसंत संगी,आमा मऊरावत हे बाजत हे नंगाड़ा अब,होली ह आवत हे । कुहू कुहू कोयली ह,बगीचा में कुहकत हे। फूले हे सुघ्घर फूल, भंवरा रस चुहकत हे। आनी बानी के फूल मन,अब्बड़ ममहावत हे। बाजत हे नंगाड़ा अब,होली ह आवत हे। लइका मन जुर मिल के, छेना लकड़ी लावत हे। अंडा के डांग ल,होली में गड़ियावत हे। नाचत हे […]

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कविता: बराती

गांव गांव में बाजत हे, मोहरी अऊ बाजा | सूट बूट में सजे हे आज दूल्हा राजा | मन ह पुलकत हाबे जाबोन बरात | अब्बड़ मजा आही खाबोन लड्डू अऊ भात | बरतिया के रहिथे टेस अड़बड़ भारी | पीये हे दारु अऊ देवत हे गारी | कूद कूद के बजनिया मन बाजा बजावत हे | ओले ओले के […]

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