मंहू पढ़े बर जाहूं : कबिता

ये ददा गा, ये दाई वो, महूं पढ़े बर जाहूं।पढ़-लिख के हुसियार बनहूं, तूंहर मान बढ़ाहूं॥भाई मन ला स्कूल जावत देखथौं,मन मोरो ललचाथे।दिनभर घर के बुता करथौं,रतिहा उंघासी आथे।भाई संग मोला स्कूल भेजव, दुरपुतरी बन जाहूं।ये ददा गा, ये दाई वो, महूं पढ़े बर जाहूं॥बेटा-बेटी के भेद झन करव,बेटी ला घलो पढ़ावव।पढ़ा लिखा के आघू बढ़ावव,थोरको झन लजावव।काम-बुता संग पढ़हूं-लिखहूं, […]

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चौमास : कबिता

जब करिया बादर बरसे, सब तन मन ह हरषे।चम-चम बिजुरी ह चमके, घड़-घड़ बदरा ह गरजे॥तब आये संगी चौमास रे…1. रुमझूमहा बरसे पानी, चुहे ले परवा छानी।पानी ले हे जिनगानी, हांस रे जम्मो परानी॥जिनगी के इही आस रे…2. गली-गली चिखला माते, नान्हे लइका मन नाचेचिरई चिरगुन ह नाचे, माटी हर महमाए।भुइंया के बुझाए पियास रे…3. भीजे ले धरती के कोरा, […]

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