लाली लाली

लाली लाली चूड़ी माँ के, लाली बिंदी लगाये हे। बघवा मा हे बइठे दाई, मोर दुवारी आये हे।। लाली लाली सिंदूर माँ के, लाली महुर रचाये हे । सबला अशीष दे के माता, मने मन  मुस्काये हे ।। लाली लाली होंठ हवय माँ, लाली मेंहदी लगाये हे । दया मया सब बर करथे माँ, नव दिन बर वो आये हे ।। लाली लाली लुगरा माँ के, लाली चुनर चढ़ाये हे।। हाथ जोड़ के भक्त सबोझन, माथा अपन नवाये हे।। प्रिया देवांगन “प्रियू” पंडरिया  (कवर्धा) छत्तीसगढ़

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पितर के दिन आ गे

पितर के दिन आगे संगी , बरा सोहारी बनावत हे।बिहनिया ले उठ के दाई, हुम जग ला मढ़हावत हे।।बबा ह आही कहिके , सबो झन ल बतावत हे।दुवारी ला लीप बहार के , लोटा ला मढ़हावत हे।। छानही मा कौआ बइठे , काँव काँव नरियावत हे।डोकरी दाई देख देख के , बबा ला सोरियावत हे।।बड़ सुरता आवत हावय , नाती ल बतावत हे।बरा सोहारी राँध राँध के , पितर ला मनावत हे।। साल भर मे एक दिन , सबके सुरता आवत हे।हुम जग ला दे के संगी , मन ला…

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