सेल्फी के चक्कर

सेल्फी ले के चक्कर में , दूध जलगे भगोना में। सास हा खोजत हे अब्बड़, बहू लुकाय कोना में । आ के धर लिस चुपचाप सास हा हाथ, बहू हा देखके खड़े होगे चुपचाप । घर दुवार के नइहे कोनो कदर , मइके से ला हस का दूध गदर। एक बात बता ऐ मोबाइल मा का हे खास, सबो झन करथे इही मा टाइम पास। चींटू अऊ चींटू के दादा इही म बीजी रहीथे, थोकिन मांगबे ता जोर से चिल्लाथे। का जानबे डोकरी आजकाल के ऐप ला, घर मा पानी…

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गरमी के दिन आगे

गरमी के दिन आगे संगी , मचगे हाहाकार । तरिया नदियाँ सबो सुखागे , टुटगे पानी धार ।। चिरई चिरगुन भटकत अब्बड़ , खोजत हावय छाँव । डारा पाना जम्मो झरगे , काँहा पावँव ठाँव ।। तीपत अब्बड़ धरती दाई , जरथे चटचट पाँव । बिन पनही के कइसे रेंगव , जावँव कइसे गाँव ।। बूँद बूँद पानी बर तरसे , कइसे बुझही प्यास । जगा जगा मा बोर खना के , करदिस सत्यानास ।। बोर कुवाँ जम्मो सुख गेहे , धर के बइठे माथ । तँही बचाबे प्राण सबो…

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