पितर के दिन आ गे

पितर के दिन आगे संगी , बरा सोहारी बनावत हे।बिहनिया ले उठ के दाई, हुम जग ला मढ़हावत हे।।बबा ह आही कहिके , सबो झन ल बतावत हे।दुवारी ला लीप बहार के , लोटा ला मढ़हावत हे।। छानही मा कौआ बइठे , काँव काँव नरियावत हे।डोकरी दाई देख देख के , बबा ला सोरियावत हे।।बड़ सुरता आवत हावय , नाती ल बतावत हे।बरा सोहारी राँध राँध के , पितर ला मनावत हे।। साल भर मे एक दिन , सबके सुरता आवत हे।हुम जग ला दे के संगी , मन ला…

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तीजा पोरा

तीजा पोरा के दिन ह आगे , सबो बहिनी सकलावत हे। भीतरी में खुसर के संगी , ठेठरी खुरमी बनावत हे।। अब्बड़ दिन म मिले हन कहिके, हास हास के गोठियावत हे। संगी साथी सबो झन,  अपन अपन किस्सा सुनावत हे।। भाई बहिनी सबो मिलके , घुमे के प्लान बनावत हे। पिक्चर देखे ला जाबो कहिके, लईका मन चिल्लावत हे।। नवा नवा लुगरा ला , सबोझन लेवावत हे । हाँस हाँस के सबोझन,  एक दूसर ल देखावत हे।। प्रिया देवांगन “प्रियू” पंडरिया  (कबीरधाम) छत्तीसगढ़

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