संगी के बिहाव

दोस्ती म हमर पराण रिहिस हे, जुन्ना अब संगवारी होगे। तोर बिहाव के बाद संगी, मोर जिनगी ह अंधियारी होगे। बाबू के घर म खेले कूदे, तै दाई के करस बड़ संसो। सुन्ना होगे भाई के अंगना, जिहाँ कटिस तोर बरसों।। अपन घर ह पराया अऊ, पर के घर अपन दुवारी होगे। तोर बिहाव के बाद संगी, मोर जिनगी ह अंधियारी होगे।। तोर आंखी म आँसू आतिस, त मोर छाती ह कलप जाये। जबै तैहा खुश होतै पगली, तभै मोला खुशी मिल पाये।। बिहाव होए ले‌ संगी तोर, दिल के…

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हिसार म गरमी

चालू होवत हवय गरमी, जम्मो लगावय डरमी कूल। लागथे सूरज ममा हमन ल, बनावत हे अप्रिल फूल।। दिन म जरे घाम अऊ, रतिहा म लागथे जाड़। एईसन तो हवय संगी, हरियाणा म हिसार।‌‌। कोन जनी का हवय, सूरज ममा के इच्छा‌। जाड़ अऊ गरमी देके, लेवय जम्मो के परीक्क्षा।‌। मोटर अऊ इंजन के खोलई, होवत हवे आरी-पारी। पना-पेंचिस के बुता म, मजा आवत हवय भारी।। टूरा ता टूरा इहाँ, नोनी मन घला मजा उठावत हे। अऊ जादा होवत हवय, ताहन मुहुँ ल फुलावत हे।। इंजन के पढ़ई म, अजय सर…

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