आगे असाढ़

आगे असाढ़ गिरे पानी रे गियां । भिंजे परवा चुहे छानी रे ।। पवन चले पुरवाही । अचरा उढाही रे गियां ।। करेजा करे चानी चानी रे । आगे असाढ़ ………

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बरखा गीत

गरजत बरसत लहुकत हे बादर. आंखी म जइसे आंजे हे काजर. मेचका-झिन्गुरा के गुरतुर बोली हरियर हरियर, धनहा डोली बरसे झमाझम, गिरत हे पानी, माते हे किसानी, बइला, नांगर गरजत बरसत लहुकत हे बादर. आंखी म जइसे आंजे हे काजर. सुरूर सुरूर चले पवन पुरवइया अंगना म फुदरे बाम्भन चिरइया गली गली बन कुंजन लागे विधुन होगे एकमन आगर… गरजत

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