जागव जी : अपन बुध लगावौ जी

अपन बुध लगावौ जी परबुधिया झन बनौ, अपन बुध लगावौ जी ! मुसुवा नो हौ.गउहा डोमी, अब तो फन उठावौ जी!! सिधवा हन पर भोकवा नही, सब ल बतादौ ! परदेशिया के जुलूम ल, अब ठेंगवा देखादौ !! नेता मंत्री बने बइठे, हावै करिया चोर ह ! अन्न धन ल लुटत हे, परदेशिया निपोर ह !! छत्तीसगढ़िया माटी के रंग […]

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पितर के कउंवा

जेन घर मा दाई ददा ह, जियत म आंसू बोहाही ग । ओ घर के तोरई भात, हमला कइसे मिठाही ग ।। बाई के बुध म दाई ददा ल, कलप कलप के रोवावत हे । सरवन बनके उही मनखे, गंगा म हाड़ा बोहावत हे ।। ओ घर मा पितर मन काबर लहुट के आही ग….। जेन घर… जेन घर मा […]

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