मरनी भात

मरे मा खवाये संगी मरनी भात ये नो हे संगी सही बात जियत ले खवाये नहीं जिंयईया ला मरे के बाद खवाये बरा सोहारी अउ लाडू़ भात छट्ठी मा खवा के लाडू़ भात बताये अपन खुषी के बात फेर मरनी मा खवा के लाडू़ भात का बताना चाहत हस तिहि जान ? ये नो हे संगी सही बात मरे मा खवाये संगी मरनी भात मरनी घर के मन पडे़ हे अपन दुख मा ओ मन ला खुद के खाय के नई हे सुध हा का खाहू ओकर धर के भात…

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नंदागे

नंदागे आते सुघ्घर गांव नंदागे बर पिपर के छाव नंदागे माया पिरित ला सब भूला के सुनता के मोर गांव नंदागे भउरा बाटी गुल्ली डंडा घर घुधिया के खेल नंदागे किसानी के दवरी नंदागे अउ नंदागे कलारी जान लेवा मोटर-गाडी नंदागे बइला गाडी आमा के अथान नंदागे नंदागे अमली के लाटा अंजोर करइया चिमनी नदागे अउ नंदागे कंडिल पाव के पन्ही नंदागे आगे हाबे सेंडिल देहे के अंग रक्खा नदागे अउ नंदागे धोती बरी के बनइया नंदागे होगे येति ओति किसान के खुमरी नंदागे अउ नंदागे पगडी घर के चुल्हा…

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