नान्हे कहिनी – मन के पीरा

आज बिहनिया जुवार चंपा अउ रमेसरी नल मेर पानी भरे के बेरा म संघरिन त चंपा ह रमेसरी ल ठिठोली करत पूछथे-का होइस बहिनी! काली तो तोला देखे बर सगा उतरे रिहिस का? रमेसरी ओकर सवाल के अनमनहा जुवाब देवत किथे-हव रे! सगा मन आइन। चहा पीइन अउ फोन नंबर मांगके चलते बनिन। चंपा फेर पूछथे-अई! का होगे बहिनी। सुंदर […]

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कलजुग केवल नाम अधारा : व्‍यंग्‍य

परन दिन के बात हरे जीराखन कका ह बडे बिहाने ले उठ के मोर कना आइस अउ पूछिस-कस रे बाबू! अब अधार बिना हमर जिनगी निराधार होगे का? में ह पूछेंव-का होगे कका? काबर राम-राम के बेरा ले बिगडाहा पंखा बरोबर बाजत हस गा? फेर कनो परसानी आगे का? मोर गोठ ल सुनके वोहा बताइस-हलाकानी ह तो हमर हांथ के […]

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