सुशील यादव के रचना

सुनव हमर सरकार पानी पलोय ओतके ,जतका के दरकार पनछुटहा सब भाग के ,खबर लिही सरकार रखव जी लीप पोत के ,साथी तीर-तखार सफई के अभियान में ,माते हे सरकार हांका जम के पार दो ,सकलाय गोतियार सुध लेवय न चेत धरय,काबर जी सरकार ईद-दिवाली सब मनय,अपने – अपन तिहार महंगाई ‘बम’ झन फुटय,सुनव हमर सरकार हमर घर ले नहक

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